पथ-हेरत पथरा गईँ अन्खियाँ



डॉ अनुज कुमार चौहान "अनुज"

आजा श्याम आजा ,एक बार आजा ।

मीठी मुरलिया की ,तान सुनाजा ।।


रण छोड़ा ,रण-छोड़ कहाए ।

शिव-शक्ति बस ,मौन बनाए ।।

अग्नि- रूप ,उदघोष करा जा ।

आजा श्याम आजा ,एक बार आजा ।।


जग अवसाद -विषाद ने घेरा ।

भारत से रहे ,दूर अँधेरा । 

चन्द्र रूप ,अमरत्व  पिला जा ।

आजा श्याम आजा ,एक बार आजा ।।


दु:ख में सुख अवतरण तुम्हारा ।

लीला मार्ग-दर्शन उजियारा ।।

अन्त कंस दु:ख , मूल मिटा जा ।

आजा श्याम आजा,एक बार आजा ।।


लीला -रास ,सर्वोच्च शांतिमय।

प्रेम भाव जड़ ,काव्य क्रान्ति मय ।।

सृष्टि पूर्ण ,निरपेक्ष बनाजा ।

आजा श्याम आजा ,एक बार आजा ।।


पथ हेरत पथरा गईँ अन्खियाँ ।

मुर्झायी पलकों की पन्खिया ।।

इन अंखियों की ,प्यास बुझा जा ।

आजा श्याम आजा,एक बार आजा ।।

संयम व्यापक ,चिन्तन साधक ।

कृष्ण -जन्म ,कैवल्य-विचारक ।।

स्मृति-ज्ञान "अनुज",बृज काजा ।

आजा श्याम आजा ,एक बार आजा ।।

मीठी मुरलिया की ,तान सुनाजा ।

आजा श्याम आजा ,एक बार आजा ।।

डॉ अनुज कुमार चौहान "अनुज"

अलीगढ़ , उत्तर प्रदेश ।

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