खुदीराम बोस देश की नन्ही तोप


सुश्री इंदु सिंह 'इंदुश्री'

खुदीराम एक नाम नहीं
देशभक्ति और जोश का पर्याय है
भारतमाता की खातिर जिसे
मौत भी स्वीकार्य है
.....
रगों में देशप्रेम बहता जिसके
आंखों में अखंड भारत का सपना
हृदय धड़के राष्ट्र हित में सदा
स्वदेश हो स्वतंत्र अपना
हर पल यही चिंता मन में रहे
जिसके लिए हर दर्द हंसकर सहे
चाहे फिर पड़ जाए मरना
कदम न आगे बढ़कर पीछे हटे
ऐसे जिसके बालक हो
वो माता जंजीरों से क्यों डरे
.....
उम्र महज़ कहने को कम
हौंसला मगर, न किसी से भी कम
जंगे आज़ादी की लिए मशाल
हर मुश्किल से भिड़ने रहे तत्पर
ऐसे किशोर हो रहते जहां
दुश्मन कब तक टिक पाएं वहां
फिरंगी सरकार भी घबराई
कमसिन तरुण की देख तरुणाई
सजा मौत की पाकर भी जो
होंठों पर मुस्कान धरे
.....
जब आई 11 अगस्त
लेकर गीता हाथ में चढ़ गए
हंसते-हंसते फांसी पर
देख यह करुण दृश्य
शत्रु का हृदय भी दहल गया
आंसू आँख से टपक गया
मरकर भी वो वीर पुत्र
इतिहास में हमेशा अमर रहा
आज उसी का बलिदान दिवस आया
आंख नहीं आसमां भी झरे
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*© ® सुश्री इंदु सिंह 'इंदुश्री'*
नरसिंहपुर (म.प्र.)

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