ई साहित्य पत्रिका दि ग्राम टुडे वास्तव में साहित्य का एक गुलदस्ता है

समीक्षा : ई साहित्य पत्रिका दि ग्राम टुडे

समीक्षक : डा बिपिन पाण्डेय


 हिंदी और हिंदी साहित्य के प्रचार-प्रसार और संवर्धन का कार्य हर व्यक्ति अपने तरीके से करता है। कुछ लोग लिखते हैं तो कुछ लोग पढ़ते हैं।कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो लिखते तो नहीं हैं पर पढ़ने और लिखे हुए को प्रकाशित करने का काम बखूबी करते हैं। ऐसा ही एक नाम है शिवेश्वर दत्त पाण्डेय जी का। जो अपने समाचार पत्र 'दि ग्राम टुडे' में अनेकानेक नवोदित और सुस्थापित कवियों और साहित्यकारों की रचनाओं को स्थान देकर उनका उत्साहवर्धन करते रहते हैं। इसी क्रम में पाण्डेय जी ने 'दि ग्राम टुडे' ई मासिक साहित्यिक पत्रिका का प्रकाशन आरंभ किया है। इस पत्रिका का प्रवेशांक जुलाई माह में प्रकाशित हुआ है। इस प्रवेशांक को मैंने आद्योपांत पढ़ा है। तीस पृष्ठीय इस ई पत्रिका में देश भर के कवि/ कवयित्रियों को स्थान दिया गया है। विषय वैविध्य की दृष्टि से देखें तो इसमें गीत,ग़ज़ल, दोहे ,हाइकु, मुक्तक आदि सभी मनोमुग्धकारी हैं।इस अंक में हास्य व्यंग्य, लघुकथा और मुक्त छंद की कविताएँ भी पाठकों को आह्लादित करती हैं।पत्रिका में हिंदी के साथ-साथ मिट्टी की सोंधी गंध बिखेरती भोजपुरी और अवधी की रचनाओं को भी स्थान दिया गया है।

सुंदर और आकर्षक कलेवर में प्रकाशित यह ई पत्रिका वास्तव में साहित्य का एक गुलदस्ता है जो अपने भावों की खुशबू से सुधी पाठकों को अपनी ओर आकृष्ट करने में सक्षम है। इस प्रवेशांक में जिन साहित्यकारों की रचनाओं को स्थान मिला है, उन्हें हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ। मुझे आशा ही नहीं वरन पूर्ण विश्वास है कि 'दि ग्राम टुडे' ई मासिक साहित्यिक पत्रिका के आगामी अंकों को संपादक मंडल और अधिक उत्कृष्ट बनाने का प्रयास करेगा और यह ई पत्रिका साहित्य के क्षेत्र में अपना अग्रणी स्थान बनाने में सफल होगी।

डाॅ बिपिन पाण्डेय 

रुड़की (हरिद्वार )

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