सावधान! कोई देख रहा है.......!

राकेश चन्द्रा

आजकल का युग कम्प्यूटर का है। वैसे तो प्रारम्भ में कम्प्यूटर का प्रयोग गणितीय प्रयोजनों के लिये किया जाता था जिसकी सहायता से कठिन गणितीय प्रश्नों का समाधान खोजने का प्रयास किया जाता था। कालान्तर में इसमें विभिन्न प्रकार के ‘एप्स’ की उपलब्धता सुनिश्चित किये जाने के फलस्वरूप कम्प्यूटर का प्रयोग बहुआयामी हो गया। जहाँ एक ओर मनोरंजन से लेकर बाजार तक प्रत्येक जानकारी उपलब्ध कराने वाले एप्स को कम्प्यूटर से जोड़ा गया, वहीं दूसरी ओर ‘फेसबुक’ जैसे एप्स से परस्पर संवाद का एक बहुउपयोगी एवं सशक्त माध्यम भी उभर कर आया। वैसे तो फेसबुक के जरिये दोस्ती को एक नया रूप और आयाम मिला है। बचपन की दोस्ती फिर से परवान चढ़ने लगी है। वहीं नये दोस्तों से जुड़ना भी सुख की अनुभूति प्रदान करता है।

फेसबुक की अपनी प्रोफाइल में हम लोग प्रारम्भ में अपने बारे में प्रारम्भिक जानकारी ही पोस्ट करते हैं। किन्तु शनैः-शनैः हम अपने दोस्तों के साथ खुलने लगते हैं और फिर हमारी प्रोफाइल मानो हमारा एनसाईक्लोपीडिया ही बन जाता है। निजी फोटोग्राफ, लोकेशन एवं अन्य कार्यव्यापार से जुड़ी सूचनाएँ भी जाने-अनजाने हमारे प्रोफाइल पर झलकने लगती हैं। अक्सर हम सामाजिक, राजनैतिक व अपने कार्यक्षेत्र से जुड़े विषयों पर नकारात्मक टिप्पणियाँ भी अंकित करने लगते हैं। सामान्य दशा में सहज भाव से देखने पर यह सब कोई विशेष महत्व नहीं रखता है। पर यह दुनिया सिर्फ अच्छे लोगों से भरी हो, ऐसा नहीं है। प्रेस एवं इलेक्ट्रानिक मीडिया के माध्यम से अक्सर ऐसी कहानियाँ सुनने व देखने को मिलती हैं जिन्हें फेसबुक के माध्यम से धोखे का शिकार बनाया गया है। कई मामलों में तो परिणाम अत्यन्त दुःखद भी रहे हैं।

फेसबुक की प्रोफाइल पर अपनी फोटो डालना और समय-समय पर विभिन्न मुद्राओं में एवं विशेष अवसरों पर लिये गए छायाचित्रों को पोस्ट करना यूँ तो सभी के लिये आम बात हो गई है पर लड़कियों के परिप्रेक्ष्य में इनके दुरूपयोग की अनेकानेक घटनायें प्रकाश में आयी हैं।  अराजक तत्व फेसबुक पर खोजबीन करके किसी के लड़की के प्रोफाइल पर जाकर किसी ‘फेक आई डी’ के माध्यम से दोस्ती का हाथ बढाते हैं। कुछ समय बाद यह फेसबुक पर दोस्ती वास्तविक जिदंगी में तब्दील हो जाती है। लड़कियों को बहला-फुसलाकर, शादी का झॉंसा देकर उनका दैहिक शोषण, और फिर ब्लैकमेलिग करना ही उन अराजक तत्वों का अभीष्ट होता है। कितनी ही भोली-भाली लड़कियों ने इन तत्वों के जाल में फंॅस कर आत्महत्या तक कर ली है।

इसी प्रकार विदेशी शक्तियों द्वारा जासूसी के उद्देश्य से लड़कियों की फर्जी आई.डी. बनाकर फ्रोफाइल तैयार किया जाता है और अपने मनचाहे सरकारी सँस्थान, विशेषकर सेना, पुलिस, पैरा-मिलिट्री बल, रक्षा संस्थानों आदि में कार्यरत लोगों को छाँटकर उन्हें फँसाया जाता है। इसे तकनीकी भाषा में ‘हनीट्रैप’ भी कहा जाता है। एक बार इस ट्रैप में फँसाकर सम्बन्धित व्यक्ति को ब्लैकमेल करके उनसे महत्वपूर्ण सूचनाएॅं व दस्तावेज प्राप्त किये जाते हैं। वर्तमान में ‘हनीट्रेप’ का  उपयोग आतंकवादी संगठनों द्वारा युवाओं को दिग्भ्रमित करके उन्हें  अपने संगठनों का सदस्य बनाने में भी बड़ी मात्रा में किया जा रहा है। कई ऐसे युवक सही रास्ते से भटक कर आतंनकवादी बन गये।

अतः आवश्यकता इस बात की है कि हम समय रहते भावी खतरे से सचेत हो जायें। इसके लिये हमें यह प्रयास करना होगा कि अपने फेसबुक प्रोफाइल पर अपनी फोटो कम से कम मात्रा में पोस्ट करें। इसी प्रकार अपने जीवन एवं कार्यक्षेत्र से जुड़ी जानकारियाँ भी न्यूनतम स्तर पर प्रोफाइल में पोस्ट की जाएँ। अपना मोबाइल नम्बर अथवा बैंक सम्बन्धी जानकारी भी यथासम्भव पोस्ट न की जाए। वर्तमान समय में शिक्षा का स्तर पहले से बहुत अधिक बढ़ा है। प्रायः सभी युवावर्ग उच्च शिक्षित है। अतः अपने ज्ञानचक्षु खुले रखना एवं विवेकशील होना ही इस समस्या से निपटने के लिये पर्याप्त है। अंत में, यह अपेक्षित होगा कि ऐसी घटनायें के घटित होने पर पुलिस में प्रथम सूचना दर्ज कराया जाए। घटनाओं पर पर्दा डालना स्वयं एवं अपराध के समान है। फेसबुक पर सावधानी आज के समय का मूलमंत्र हैं।

राकेश चन्द्रा

लखनऊ

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