मेरे कमरे में एक अलमारी रहती है

 


कैलाशसिंह राठौड़  

जिन आँखों मे लाचारी रहती है

उन कंधों पर जिम्मेदारी रहती है


वो जो पुकारे जाते है नालायक

उनकी सबसे अच्छी यारी रहती है


मैं पहुंच पाता हूँ तुम तक देरी से

बीच मे यह जो दुनियादारी रहती है


वो कहलाती है पापा की परी

लड़की जब तक कुंवारी रहती है


झूठे प्यार की इक निशानी यह भी है

शुरू-शुरू में जियादा खुमारी रहती है


बातों-बातों में झगड़ते है हम दोनों

हमारी लड़ाई है कि जारी रहती है


हर रोज समेट रखता हूँ एक ख़्वाब

मेरे कमरे में एक अलमारी रहती है


© कै.एस.राठौड़



परिचय


नाम:- कैलाशसिंह राठौड़  

पता:- पूगलगढ़ जिला  "(बीकानेर) राजस्थान

Mob:- 9460596055

Email:- kailashrathore191097@gmail.com

पेशा:- स्वतंत्र लेखक एवं बैंककर्मी

शिक्षा:- M.A ( हिंदी साहित्य )

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