स्वार्थ के धरातल पर कार्य जो हैं करते


डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव

स्वार्थ के धरातल पर कार्य जो हैं करते,

उनका पतन सुनिश्चित है पड़े रहें करते।


चापलूसी प्यारी उन्हें आगे पीछे हैं रहते,

आम को इमली,इमली को आम कहते।


देखा है ऐसा मैंने ऐसा भी हैं लोग करते,

अपना जमीर कोई नहीं हाँ हुजूरी करते।


कह दो तो बुरा लगे सिद्धांतवादी बनते,

अपनी चालाकी में मुखिया संग हैं रहते।


दांव पेंच करते करवाते निश दिन हैं रहते,

दुनिया के नजरों से गिरने पर हैं संभलते।


बाजी जब कोई उनकी उलटी पड़ जाती,

नुक्सखोट में कुछभी न निकल के आती।


तभी तो आताहै कोई ऊंट पहाड़ के नीचे,

सांसत में जान डालके अपना हाथ खींचे।


जो इज्जत है सब के साथ बैठने उठने में,

मिलती नहीं कभी वैसी चापलूस बनने में।


स्वाभिमान ईमानदारी से अपना कर्म करें,

ड्यूटीफुल रहते हैं तो किसी से काहे डरें।


ऊपर वाला सब देख रहा है हमारा करना,

जब तक वो न रूठे कुछ नहीं है बिगड़ना।


डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव

वरिष्ठ प्रवक्ता-पी बी कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र.

(शिक्षक,कवि,लेखक,समीक्षक एवं समाजसेवी)

इंटरनेशनल एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर-नार्थ इंडिया

एलायन्स क्लब्स इंटरनेशनल,कोलकाता-इंडिया

संपर्क : 9415350596

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