इंतजार

 डाॅ. पुनीता त्रिपाठी

करके आज बैठी श्रृंगार 

राह प्रियतम का निहार ||

अंखिया देखे पंथ तिहार

जोहती तेरा ही मनुहार ||


बिन तेरे चुभती बयार

मनाऊँ कैसे ये त्योहार ||


लागे सुन्दर पुहुप खार

प्रिय लिए आ प्रेमाहार. ||


स्वरचित__ डाॅ. पुनीता त्रिपाठी

शिक्षिका, महराजगंज उ. प्र.

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