ग़ज़ल

 

'ऐनुल' बरौलवी

दे गया माहे - रमज़ाँ खुशी ईद की

हो मुबारक तुझे ये घड़ी ईद की


भूल जाओ चलो सारे शिकवे - गिले

सेवई ख़ूब खाओ पकी ईद की


लाॅकडाउन में घर पर है पढ़ना नमाज़

फोन पर बाँटो सबसे खुशी ईद की


तुम बनावट , नहीं कुछ दिखावा करो

आज क़ाइम करो सादगी ईद की


छोड़ नफ़रत , सदाक़त पे चलते रहो

प्यार ही प्यार पाओ गली ईद की


हाथों को है मिलाना मना , कर सलाम

दो मुबारक मगर तुम सभी ईद की


या ख़ुदा तुम सलामत रखो और दो

दिल में उल्फ़त , लबों पर हँसी ईद की


है दुआ आज 'ऐनुल' सभी के लिये

हर चेहरे पर खिले इक कली ईद की


 'ऐनुल' बरौलवी

गोपालगंज (बिहार)

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