तबाही में कमाई



अमृता पांडे

पिछले एक वर्ष का समय  किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं वरन विश्व भर के लिए बहुत ही दुष्कर रहा है। विश्व भर में कोरोनावायरस की जद में आए लोग और उनकी तकलीफ देख कर दिल बैठा जा रहा है।
अपने देश की बात करें तो वायरस का खतरनाक रूप पिछले दो-तीन महीने से बहुत ही सता रहा है। लगभग हर व्यक्ति का कोई ना कोई परिचित, रिश्तेदार, मित्र या  सहकर्मी इसकी चपेट में है लेकिन फिर भी लोगों का गैर जिम्मेदाराना व्यवहार देखने को मिल रहा है। आम आदमी का पैसा पानी की तरह जा रहा है। लालच ईमान पर भारी पड़ा है। हर आदमी इस आपदा को अवसर के रूप में भुनाने का प्रयास कर रहा है। एंबुलेंस की बात हो, ऑक्सीजन या दवाइयों की। पिछले वर्ष की शुरुआत से ही साधारण से मास्क की कीमत तीन से चार गुना वसूली जा रही हैं। जमाखोरी और कालाबाजारी तो जैसे हमारे उपनाम और विशेषण बन गए हैं। 

सुखद पहलू यह है कि कुछ लोग अपनी जान की परवाह किए बिना दूसरों की सेवा कर रहे हैं कई स्वयंसेवी संस्थाएं हैं जो इस कार्य में रात दिन एक कर रही हैं। कोविड-19 के रोगियों को घर में ही भोजन पहुंचाना, रक्त, प्लाज्मा, बैड,ऑक्सीजन और दवाओं का इंतजाम कराना जैसा चाहे कोई भी कार्य हो, ये सरकारी तंत्र से बेहतर तरीके से कर रहे हैं। 

अपने शहर में कई समूहों से जुड़े कर्मवीरों को देखा है जो रात दिन अपने अपने स्तर से लोगों की मदद कर रहे हैं। सैनिटाइजेशन का कार्य भी यह लोग कर रहे हैं जबकि सरकारी मशीनरी सुप्त पड़ी है‌। वह उहापोह  की स्थिति में नज़र आ रही हैं। अपने ही दिए फैसले आए दिन पलट रही है। श्रेष्ठ जननीति तो वही है जो वैज्ञानिक सोच और तार्किकता पर आधारित हो। फिर लोगों को स्वास्थ सुविधा मुहैया कराना सरकार की ही ज़िम्मेदारी बनती है। 

आज चंद सांसों के लिए आदमी अपने जीवन भर की कमाई  लगाने को तैयार है, जिसका फायदा बिचौलियों उठा रहे हैं। अभी पिछले महीने हमने विश्व पृथ्वी दिवस मनाया मगर हकीकत में कितने लोग इसे बचाने के लिए फिक्र मंद हैं...?
ऑक्सीजन की किल्लत और मौत का तांडव हम साल भर से देख रहे हैं। प्रकृति के इशारों को समझना होगा। प्रकृति के साथ चलने में भलाई है परंतु दो कदम आगे चलने में निश्चय ही तबाही है।
साथ ही यहां भी कहना चाहूंगी कि अपनी जान जोखिम में डालकर दूसरों की मदद करने वाले लोगों को सम्मानित और प्रोत्साहित करना जहां आवश्यक है वही कालाबाजारी करने वालों को दंडित करना भी उतना ही आवश्यक है। 

अमृता पांडे
हल्द्वानी नैनीताल
Popular posts
भोजपुरी भाषा अउर साहित्य के मनीषि बिमलेन्दु पाण्डेय जी के जन्मदिन के बहुते बधाई अउर शुभकामना
Image
दि ग्राम टुडे न्यूज पोर्टल पर लाइव हैं अनिल कुमार दुबे "अंशु"
Image
अभिनय की दुनिया का एक संघर्षशील अभिनेता की कहानी "
Image
भोजपुरी के दू गो बहुत जरुरी किताब भोजपुरी साहित्यांगन प 
Image
डॉ.राधा वाल्मीकि को मिले तीन साहित्यिक सम्मान
Image