!!मेरा हृदय उद्गार !!

!!चरणों में बसा लो हे भगवन !!


गिरिराज पांडे

चरणों में अपने हे भगवन स्थान मुझे भी दे देना 

निस दिन मैं तुझको ही देखूं दिल में ही मेरे बस जाना

 मैं दुनिया भूल भले जाऊं पर तुझको मैं ना भूल सकूं

 मैं प्रीति करूं तुझसे हरदम तेरे चरणों की मैं धूल बनू

 अच्छा हूं बुरा हूं जैसा हू पर दास तो तेरा सच्चा हूं 

मेरे दिल को बना कर घर अपना उसमें ही ठिकाना बना जाना 

जो भी गलती मुझसे है हुई उसको भूल सदा जाना

 जितनी बुद्धि हमें दी है प्रभु उतना ही कर्म मै कर पाऊं 

कर्म कराने वाले तुम तुम ही फल देने वाले हो 

तुम ही संसार रचे भगवान तुम ही तो जग के पालक हो

तुम ही तो जीवन हो सबका तुम ही सृष्टि विनाशक हो 

विनती मेरी स्वीकार करो जग से मेरा उद्धार करो 

मैं डूब ना जाऊं बीच भंवर मेरा बेडा अब तो पार करो


 गिरिराज पांडे

 वीर मऊ 

प्रतापगढ़

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