कोरोना काल:आपदा में मुनाफा खोरी

नीरज कुमार सिंह

कोरोना काल में हर तरफ कोहराम मचा हुआ है।सभी अपने विवेक अनुसार इस बीमारी के फैलने का कारण बता रहे हैं।कोई कह रहा है की नेताओं, के द्वारा रैली ,और चुनाव के कारण ही कोरोंना इतना विकराल रूप धरा है।खैर कारण जो भी हो ।हम अपने उपर कभी जिम्मेदारी नहीं लेते क्या हमने अपनी ईमानदारी दिखाई? नही, हरगिज नही ,।थोड़ा कोरोना क्या थमा था सबने मास्क से मुख मोड़ लिया ,सभी भीड़ भाड़ में जाने लगे थे ।तमाम पर्वों में शामिल होने लगे थे ।यहां तक की शादियों सैकड़ो बारातियों को ले जाने लगे थे,वो भी बिना मास्क सेनिटाईजर के ।कुल मिलाकर हम नेताओ मंत्री प्रधानमंत्री के उपर सबकुछ रखकर हम अपनी लापरवाही पर

पर्दा डालने का प्रयास कर रहे हैं।चलिए ये तो हुई बात कोरोना के दोबारा बढ़ने की। अब सुनते हैं दूसरी चक्र के कोरोना के न थमने के कारण ।हम बहुत सहजता से सरकार की लचर व्यवस्था को दोषी बना दे रहे हैं ।हम इस बात को इग्नोर कर रहें की कुछ धनिक उद्योपति , व्यपारी वर्ग 

रीमेडीसीवर ,सिलेंडर ,आक्सीजन यहां तक की हॉस्पिटल बेड पहले से अधिक पैसे देकर रिजर्व कर रखें हैं ,आपदा की घड़ी में दवाई तक रोक लिए हैं ऐसे लोगो को हम क्या कहें ?कुल मिलाकर सरकार तो दोषी है ही लेकिन हम कम दोषी नही हैं ।इंसानियत मरती जा रही हैं। आपदा की घड़ी में मुनाफाखोरी कर रहें हैं क्या भूल गए हैं ?की ये वो देश जहां पशु पेड़ पौधे तक में भगवान देखा जाता है ,आज हम इंसान होकर इंसान को ही, मारने लगे हैं मुनाफा खोरी की लालच में ।यह उचित नहीं है ,हमे जागना होगा इंसानीयत को याद करना होगा ।

हमे अपने कर्तव्यों के प्रति, 

ईमानदारी बरतना होगा ।


नीरज कुमार सिंह

देवरिया यू पी

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