रंग जीवन के




श्री कमलेश झा

 रंग बहुत हैं जीवन में जो बदलते रहते क्षण में मात्र ।

कभी दिखता सुखद अनुभूति या कड़वी घुट पिलाता क्षण में मात्र।। 


 रिश्तों के गहराई में कभी ला देता मतभेद का सैलाब ।

 या फिर कभी कुछ अच्छा करके बढ़ा देता आपसी सौहार्द।। 


 इंद्र धनुषी रंग भी फीका जब किलकार उठता परिवार ।

 रजनी के तम से भी गहरा जब छूटता अपनो का साथ।।


आपाधापी चलता रहता है क्षणभंगुरी जीवन के साथ साथ ।

 मृदु और कटु अनुभव संग जीवन नैया चलता साथ।।


 रंग बदलते जीवन मे मिलते हैं अपनो का प्यार ।

कभी चमक तो कभी अश्रु बन याद दिलाता अपनो का प्यार ।।


 रंग स्याह तब होता है जब मिलता अपनो का विछोह ।

हृदय पीड़ बनकर आता है अपनो का मिला विछोह।। 


 नील गगन का रंग एक है सूरज और चंदा का भी एक रंग ।

 फिर जीवन मे रंग अलग क्यों बदलता है क्यों जीवन के रंग।।



 रंग रंग के चक्कर मे हम भी तो बदलते हैं रंग ।

गिरगिट मकड़ी पीछे छुटे जैसे मानव बदले रंग।। 


 मानव जीवन एक बार है रिस्ते की गहराई अनंत ।

 मोल तोल कर रिस्ते घटते मानव के करनी के संग।। 


 रंग भरें बेसक जीवन में खुशियां ही खुशियाँ भरमार।

 जीवन पथ पर चलकर जाना सत्कर्म का लिए भरमार।।।। 


श्री कमलेश झा

नगरपारा भगालपुर

बिहार

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