ये अनमना समय कुछ अच्छा सीखा गया

भावना ठाकर 'भावु'

कोरोना महामारी का बवंडर बहुत सारी मुश्किलों में कुछ अच्छी आदत भी सिखा गया।

किसने सोचा था समय की तेज रफ़्तार के संग दौड़ती दुन्यवी गतिविधियाँ थम जाएगी। कितने घर के दीपक बुझ गए, कितनी सुहागनों का सुहाग छीन गए। दो तीन मेरे अपने भी कोरोना की बलि चढ़ गए। पसंद तो बिलकुल नहीं ये समय। फिर भी जरूर कहूँगी शुक्रिया 2020/21 

क्यूँकि लाॅक डाउन के चलते आस-पास बसे बहुत सारे निर्जीव दोस्तों से मिलवाया। जी हाँ जिसे कभी जी भर कर देखने की फ़ुर्सत नहीं थी उन सबको सहलाया ये बाल्कनी में टंगे झूले पर धूल जम गई थी फ़ुर्सत किसे थी, थमे हुए लम्हों ने ये वजह दी। गमलो में जो छोटे-छोटे पौधे लहरा रहे है उसे पानी देते वक्त मैंने ध्यान से देखा, हौले से छुआ तो ऐसा महसूस हुआ मानों मेरे सामने मंद-मंद मुस्कुरा रहे थे ज़िंदगी की आपाधापी में कभी देखा ही नहीं प्यारे पौधों की परवरिश नहीं की बस फ़र्ज़ के तौर पर जैसे और काम निबटा देते है वैसे खाद पानी देकर निकल जाते थे।

वैसे ही एक दिन मैंने अपनी अलमारी का वो हिस्सा खोला जो काफ़ी समय से बंद पड़ा था कुछ किताबें जो बड़े चाव से खरीद लाई थी दिल में दर्द और आँखें नम हो चली सच वो किताबें पढ़ी तो ऐसा लगा मानों अपनों से मिली। एक छोटे से मोबाइल नाम के खिलोने ने जुदा कर दिया था। राजभोग सा रोज़ थाल सजता था दाल रोटी से चलाना सिखाया, अपने हिस्से की रोटी के दो हिस्से करना और आसपास बसे जरूरतमंदो में बाँटना सिखाया। कामवाली, धोबी, वाॅचमेन और मज़दूरों की ज़िंदगी को नज़दीक से देखने का समझने का मौका मिला और अपनी हैसियत के मुताबिक उनकी सहायता करने का अवसर प्राप्त हुआ।

परिवार से पहचान करवाई, नज़दीकीयाँ बढ़ी और एक दूसरे को समझने का मौका मिला। साथ में आत्मनिर्भरता का पाठ पढ़ाया। एक दिन कामवाली के बगैर नहीं चलता था वहाँ महीनों हाथ चलाएं। और सबसे बड़ा पाठ सीखाया की बुरा वक्त कभी बताकर नहीं आता बचत करना सीख लो, पग-पग पैसों की जरूरत आपको ऐसे समय में किसीकी मोहताज नहीं बनाएगी अगर चार पैसे जोड़ कर रखे होंगे। कुल मिलाकर खुद के लिए जीना सिखाया हर संघर्ष का हौसलों के दम पर सामना करते पूरा साल बिताया।

पर अब एक अरज सुन लें ए अनमने वक्त जाते जाते कोरोना को साथ ले जा और कोई अच्छी यादें दे जा। आनेे वाला समय खुशियों की सौगात लेकर आए हर मन पर पड़े अवसाद के बादल छंंटे और नेमतों के उपहार से आने वाला साल हम जी भरकर खुशी खुशी जीएं।

(भावना ठाकर,बेंगुलूरु)#भावु

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