" कीमत इन्सान की"


दिनेश चन्द्र प्रसाद "दीनेश" 

आज इन्सान की कीमत घट गई है।

पैसे की भूख इतनी ज्यादा हो गई है।।


मानवता इंसानियत खत्म हो गई है।

लालच और लूट खसोट बढ़ गई है।।


मर रहा है आदमी आज जानवर की तरह।

इंसान को इंसान नोच रहा गिद्ध की तरह।।


सोचा नहीं था कोई ऐसा समय भी आएगा।

आदमी को देख आदमी ही घबराएगा।।


एक महामारी क्या धरा पर आ गया।

मानव से दूर आज मानव भाग गया।।


कुत्ते पाले जाने लगे अब हर घरों में।

ले कटोरा इंसान भटक रहा शहरों में।।


खतरा गैरों से नहीं अब अपनों से है।

डर नफरत से नहीं अब प्यारों से है।।


स्वार्थ आज इतना ऊँचा उठ गया है।

जाति धर्म उनका सब बदल गया है।।


कटवा देते हैं लोगों को गाजर मूली की तरह।

स्वार्थ पूरा हो उनका चाहे किसी भी तरह ।।


इंसानी कीमत गिर गई है शेयर बाजार की तरह।

स्वार्थ बढ़ गया है उनका नागफनी की तरह।।


"दीनेश" इंसान की कीमत क्या है इस देश में।

सत्ता सबसे प्यारी है इस अनोखे देश में।।


दिनेश चन्द्र प्रसाद "दीनेश" 

कलकत्ता

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