नकाब


उदय किशोर साह

कोई नहीं दीखता है शहर में

जिस पर हम यकीन करें

जो भी मिलता है नगर में

नकाब ओढ़े हैं सामने खड़े


किस पर करें भरोसा ओ रब

अब तूँ ही हमें बता देना

जो भी सामने नजर आता है

सबने दी है दगा मुझे


विश्वास किसी पर कर लेना

आठवाँ आश्चर्य अब है बना

सोंच समझ कर किसी पे यकीन

अब तुमको किसी पर है करना


चापलुसी से करते हैं वो

होते हैं असली सियार

आगे पीछे घूमने वाला

असल में होते हैं गद्दार


कैसे कैसे चेहरे लेकर

इन्सान जग में है पड़ा

मासुमियत का लबादा ओढ़े

अपराधी कतार में है खड़ा


समय आने पर अपना भी

कर जाते है हरकत शर्मनाक

अपना कौन पराया है कौन

भूल जाते हैं अक्सर वो बात


हर मोड़ पे दीख रहा है

वहशी खड़ा इस बाजार में

क्या हो रहा है भगवन तेरी

इस खूबसूरत संसार में


उदय किशोर साह

मो० पो० जयपुर जिला बाँका विहार

9546115088

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