साहित्यिक पंडा नामा:८७७

 



भूपेन्द्र दीक्षित


आज महोली में भाई राजकुमार तिवारी जी के विद्यालय हिन्दी दिवस के अवसर पर जाना हुआ। मैं तो बहुत कम कहीं जाता हूं। लिखना और पढ़ना। इससे आगे परिवार।बस। बहुत अच्छा लगा तिवारी जी का विद्यालय।खासकर उनके पुत्र से मिलकर मन बहुत प्रसन्न हुआ। होनहार बिरवान के होत चीकने पात।यह बालक बहुत आगे जाएगा।


विद्यालय के प्रिंसिपल साहब बहुत विद्वान और सहज सरल व्यक्तित्व के धनी हैं। उन्होंने हमारा दिल जीत लिया। प्रबंधतंत्र के मामले में हमारा अनुभव बहुत खराब रहा है। इसीलिए एच आर डी इतना अच्छा कालेज होते हुए डा•ज्ञानवती वहां नहीं गयीं। यद्यपि हम सबका वोट उस कालेज को था। लेकिन यहां देखा प्रबंधतंत्र के लोग विद्वान और सज्जन हैं।वे गुणग्राहक हैं। भाई राजकुमार तिवारी जी की प्रशंसा तो सूर्य को दीपक दिखाना है। बहुत अच्छे कार्यक्रम के बाद हम स्वर्गीय कमलेश चंद्र मिश्र जी के परिवार से मिलने गये।किसी ब्राह्मण की मृत्यु हो जाए,तो उसके चरित्र हनन के प्रयास कितने‌ व्यापक रुप से होने लगते हैं,यह भी देखा।हम भुक्तभोगी हैं।जो प्रिंसिपल अपने कालेज का जल तक नहीं पीती,उस पर प्रबंधसमिति और उनके खासोखास अखबार वालों ने कैसे कैसे आरोप लगाए। बजरंगबली ने ही हमारी रक्षा की। ईश्वर दिवंगत के सम्मान की भी रक्षा करे ,यह कामना करता हूं।


जय हिन्दी!जय नागरी!!


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