डॉ. संध्या सिन्हा 'सूफ़ी' की पुस्तक 'बोलने दो' का लोकार्पण 


जमशेदपुर की कवयित्री डॉ. संध्या सिन्हा 'सूफ़ी' की सद्यःप्रकाशित पुस्तक 'बोलने दो' का लोकार्पण सर्व भाषा ट्रस्ट (प्रकाशन), नई दिल्ली के फेसबुक और यूट्यूब आभासी मंच पर हुआ। 


 पुस्तक 'बोलने दो' के लोकार्पण कार्यक्रम की अध्यक्षता ए बी कॉलेज जमशेदपुर की प्राचार्य डॉ मुदिता चंद्रा ने किया जबकि कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हिंदी-भोजपुरी के सुप्रसिद्ध रचनाकार व आलोचक प्रो. बलभद्र थे। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि करीम सिटी कॉलेज के उर्दू विभागाध्यक्ष, इस पुस्तक के भूमिकाकर तथा प्रसिद्ध शायर जनाब अहमद बद्र और डी बी एम एस कॉलेज ऑफ़ एजुकेशन की प्राचार्य डॉ. जूही समर्पिता थीं। पुस्तक पर विस्तृत व सारगर्भित वक्तव्य रखने के लिए मुख्य वक्ता तथा हिंदी-भोजपुरी के साहित्यकार श्री जे पी द्विवेदी जी थे। कार्यक्रम का प्रभावशाली और रोचक संचालन डी ए वी पी जी कॉलेज वाराणसी की डॉ. सुमन सिंह ने किया जबकि सर्व भाषा ट्रस्ट के संयोजक केशव मोहन पाण्डेय ने पुस्तक के मुद्रण की स्मृतियों को साझा करते हुए पुस्तक की चर्चा की। 


 डॉ. अहमद बद्र ने बताया कि कविताएँ जीवन के यथार्थ की कथा बाँचती हैं। डॉ. जूही समर्पिता ने कवयित्री डॉ. संध्या सिन्हा 'सूफ़ी' के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए उन्हें कुशल शिक्षित और सहज-सरल व्यक्तित्व की स्वामिनी बताया। प्रो. बलभद्र ने कहा कि डॉ. संध्या की कविताएँ उनके अतीत की थाती हैं। जे पी द्विवेदी ने पुस्तक पर विस्तृत समीक्षा प्रस्तुत करते हुए कविताओं का भोजपुरी अनुवाद भी सुनाया। डॉ. सुमन सिंह ने बताया कि 'बोलने दो' में कवयित्री के नारी-सुलभ संघर्षों की कविताएँ हैं। अपने अध्यक्षीय भाषण में डॉ. मुदिता चंद्रा ने कविताओं को अपने जीवन का दर्पण कहते हुए बताया कि कविताएँ जो कह रही हैं, वह हम सबके जीवन की बात है। कवयित्री की लेखनी में असीम सम्भावनाएँ व्यक्त करते हुए उन्हें अनंत शुभकामनाएँ दीं। कार्यक्रम का प्रभावशाली और रोचक संचालन डॉ. सुमन सिंह ने किया। अंत में आगंतुकों के डॉ. संध्या सिन्हा 'सूफ़ी' ने धन्यवाद ज्ञापित किया।


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