राधा कृष्ण संवाद


तू भोली भाली राधा है,
मैं नटखट कृष्ण कन्हैया हूँ,
हर गोपी संग रास रचाता हूँ,
करना ना तू विश्वास प्रिये।


तू हर गोपी रास रचाता है,
मैं हर गोपी की धड़कन हुँ,
हर दिल में मुझको पाओगे,
है तुझ पर ये विश्वास प्रिये।


मैं मस्त हवा का झोंका हूँ,
दामन छू कर उड़ जायूँगा,
मैं जाती हुई बयार प्रिये,
करना ना मुझसे प्यार प्रिये।


तू मस्त हवा का झोंका है,
मैं रजनीगंधा का पुष्प प्रिये,
खुशबू बन के बस जाऊँगी,
मैं आऊँगी तेरे साथ प्रिये ।


तू मेरी बांसुरी की धुन बन जा,
बन जा तू मेरा प्राण प्रिये,
है कृष्ण जहाँ राधा बसती,
 बरसा दे अपना प्यार प्रिये।


मैं जब गीता का ज्ञान बनूँगा,
करना मुझको सम्पूर्ण प्रिये,
जब तेरे नाम का जयकारा हो,
राधे संग जुड़ जाये श्याम प्रिये।


नीलम द्विवदी
रायपुर (छत्तीसगढ़)


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