"माँ"


माँ ही ईश्वर का रूप बनी,
माँ से ही दुनिया शुरू हुई, 
रूप क्या स्वरुप मे भी विकराल बनी,
इनकी तुलना सोचना भी सबसे बड़ी भूल हुई।


 कुछ लोग अपने को पुरुष प्रधान मानते हैं,
 सम्मान पाने के लिए नारी पर अत्याचार करते हैं।
 सुन ले मूर्ख! ईश्वर ने श्रेष्ठ बनाया है, इनको,
 खुद मर कर नारी ही जन्म देती है, तुझको। 
 अगर इतना ही अभिमान है, तुझे अपने बल पर, 
 तो खुद के दम पर, दुनिया बसा ले दूसरे ग्रह पर। 


वह बेटा-बेटा करती है और बेटा अनसुना करता है,
मां के लिए प्यार क्या, सिर्फ आज के लिए ही होता है,
हम माँ-माँ करते हैं, और माँ हमारी हो जाती है,
तो फिर बुढ़ापे में मां, वृद्धा आश्रम में क्यों नजर आती है?


 प्रियंका चौरसिया
 कोलकाता


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