कुछ खामोशियाँ दफन की है मैने

ना देख मेरी इन झील सी आँखो को
इसमे दर्द का अथाह समुन्दर समाया है
कुछ खामोशियाँ दफन की है मैने!
कुछ को तो बहती आँसुओ मे बहाया है


मै अल्हण सी चंचल चित चोर बावरी
#बल्लू सब कह मुझे बुलाते है
कितने दर्द समेटे है इन पलको मे कहीं
सब सिपाही बन भी कहाँ ढूंढ पाते है


है अपनी तबीयत मे तो खामी भी यही है
मुस्कुरा कर बहुत कुछ खोया है हमने
न देखा अपनो का दर्द कभी हमने 
निभानी भी तो हमने जिन्दगी मे बहुत है


बाबा मेरे कहते थे हमे हम सबसे प्यारी है
चाँद की तरह हम्म है सबसे दुलारी है
करके बिदा बाबा ने नई दुनिया का प्यार दिया
खुशियाँ दी हमे मुझे तो पुरा संसार दिया


निगाहो की बेचैनी हमारी हममे खो गयी
हम्म बचपन की सारी यादे वही छोड़ आये
जहाँ हमने किसी अजनबी का हाथ थाम 
एक छोटी सी अपनी बचपन जी रखी थी


कुछ यादे आकर बचपन की हमे रुलाती है
मेरी तमाम सुकुन तबाह कर चली जाती है
आहटे सुनकर उनकी जब दरवाजा खोला है
वो ना आये हवाओ ने मजाक कर खेला है


मनोरमा सिंह


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