कजरी

धरती हुलसलि तन गदराइल
बादर बरिसे पानी हो।


मलि-मलि गात लजात नहइली
हरियर चुनर पेन्हि इतरइली
लेइ निसानी हो,
गतरे-गतर प्रीत अँखुआइल
हरखित लेइ निसानी हो।


दादुर देखत रूप रिगावे
झींगुर मंगल सोहर गावे
बोलत बानी हो
मोरवा नाचि-नाचि अगराइल
निरखत बोलत बानी हो।


अनगिन धी-सुत आँचर छाया
अनहद झरे पसारे माया
रचल कहानी हो
चिगुदी-चिगुदी तन झँझराइल
सृजन क रचल कहानी हो।


देन लेन पर हरदम भारी
बिन स्वारथ निज तन के जारी
रीत पुरानी हो
कहियो तनिक शिकन ना आइल
इनके रीत पुरानी हो।


*संगीत सुभाष*


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