चौकी प्रभारी हरौनी के बिगड़े बोल पत्रकार से की अभद्रता,परिचय बताने के बाद भी हुआ मुजरिमों जैसा व्यवहार

पब्लिक पॉवर, लखनऊ बंथरा, उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के साथ ही सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने पत्रकारों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर सभी विभागों को आदेशित किया था कि किसी भी पत्रकार के साथ किसी भी अधिकारी के द्वारा अभद्र भाषा का प्रयोग नही किया जाएगा। पत्रकार के समाचार संकलन में सहायता करने का प्रयास करें। लेकिन उत्तर प्रदेश पुलिस नही मानती मुख्यमंत्री के आदेश,लखनऊ में पुलिस कमिश्नरी लागू होने के साथ ही बेलगाम हो गयी लखनऊ पुलिस। अक्सर अखबारों की सुर्खियों में देखा जाता है कि पुलिसकर्मी पत्रकारों के साथ अभद्र व्यवहार करते हुए नज़र आते हैं।
ताजा मामला उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के बंथरा थाना क्षेत्र की हरौनी चौकी का है। यहाँ चौकी प्रभारी शिव नारायण सिंह के बोल इतने बिगड़ गए कि पत्रकार को भद्दी भद्दी गालियां देने के साथ ही कॉलर पकड़ कर चौकी में बन्द कर दिया गया।
मिथलेश कुमार सह संपादक पब्लिक पॉवर दैनिक /साप्ताहिक समाचार पत्र,के पत्रकार के साथ कुछ ऐसा ही हुआ।


*आखिर पत्रकार के साथ ऐसा क्यों करती है पुलिस*


जब किसी नए  चौकी प्रभारी की नियुक्ति होती है तो वह चौकी में आने के बाद अपने साथी पुलिसकर्मियों से क्षेत्र की पूरी गतिविधियों की जानकारी प्राप्त कर लेते है जैसे कौन सा व्यक्ति पुलिस को पैसा कमावाने में मदत करता है। कौन इस क्षेत्र का प्रतिष्ठित व्यक्ति है। आखिर क्यों जानने का प्रयास नही किया जाता है कि इस क्षेत्र कौन से प्रतिष्ठित पत्रकार है आखिर क्यों?


घटना दिनांक 11 जुलाई 2020 को लॉकडाउन के दौरान हरौनी कस्बे मे कुछ जरूरी काम से गया था। थाना बंथरा की हरौनी चौकी के बगल में एक होटल की खाली मेज पर पहले से कई पुलिसकर्मी  बैठे थे। जानपहचान होने के कारण वहां बैठ गया। इतने में  हरौनी चौकी प्रभारी शिव नारायण सिंह चौकी से निकल कर आए और अपने स्टाप के लोगो को डाँटते हुए चौकी आने के लिए कहा। साथ में पत्रकार से भी वहाँ से जाने के लिए बहुत तेज आवाज में कहा। जब तक पत्रकार उठता शिव नारायण सिंह ने गाली देते हुए अभद्र भाषा का प्रयोग करने लगे। जब पत्रकार ने गाली देने  का विरोध किया। तो वो और भी आक्रमक होने के साथ मारने (पीटने) के लिए आगे बढ़े,पत्रकार ने कहा की मैं पेशे से पत्रकार हूँ। कुछ जरूरी काम से आया था, तो टीशर्ट पकड़ कर एक मुजरिम की तरह घसीट कर चौकी में बन्द कर दिया। वहाँ भी पत्रकार ने शिव नारायण सिंह से नम्रतापूर्वक अपना परिचय दिया। लेकिन इन्होंने एक बात नही सुनी कहा तू अपना परिचय मुझको बताने के लिए रहने दे। दो कौड़ी का पत्रकार है।
पत्रकार से नाम,पिता जी का नाम ,पता, किस मीडिया में काम करते है। इतना पूछने के बाद मीडिया कार्ड भी देखा,फिर भी काफी समय अन्दर बन्द रखा। बहुत देर तक बन्द रखने के बाद छोडने के साथ सख्त हिदायत दी गई कि इधर दिखाई मत देना। नही तो गम्भीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर सीधे जेल भेज दूँगा।
जब कि पत्रकार एक (NGO) जय जिन्द बाबा सेवा समिति का अध्यक्ष भी है क्षेत्र में सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में स्वच्छ छवि है। फिर भी इस तरह अभद्र, भाषा से पत्रकार की भावनाओं को आघात पहुँचा है। साथ ही दरोगा ने  सामाजिक छवि मान प्रतिष्ठा भंग करने के उद्देश्य से यह घृणित कार्य किया है। उसी समय से पत्रकार मानसिक तनाव में है। अब यह देखना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के द्वारा पत्रकारों की सुरक्षा का दावा कहाँ तक सार्थक सिध्द होता है।


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