विश्वासघात

आलेख




विश्वास घात सुनने में  मन को दुखी कर देने वाला शब्द लगता है। जब किसी को इसका सामना करना पड़े तो उस व्यक्ति पर क्या गुजरती होगी जिस पर हम पूरा भरोसा और विश्वास करते हैं ।अगर वही व्यक्ति हमें आघात पहुँचाता है । जब हमें  किसी विषय वस्तु का कोई ज्ञान नही होता है। किसी सज्जन, प्रबुद्ध,प्रतिष्ठित व्यक्ति से विषय संबंधित सहयोग या मार्गदर्शन माँगते है ,और उन महानुभाव द्वारा गलत जानकारी और मार्गदर्शन दिया जाता है ,या सहयोग माँगने वाले व्यक्ति को गुमराह किया  जाता है । ये जानते हुये भी कि मदद माँगने वाला व्यक्ति विषय वस्तु का ज्ञान नही रखता है  तो उसकी अज्ञानता का नाजायज फायदा उठाना  और  विश्वास में लेकर विश्वास घात करना भी अपराध की श्रेणी में ही आता है।
जब कोई ऐैसा करता है। तो मन में सहसा भाव आता है। कि हम किस पर विश्वास करें ।कौन झुठा और कौन सच्चा है ।एक संदेहास्पद स्थिति मन में निर्मीत हो जाती है ।और इसका समाज पर गलत प्रभाव जाता है।और ऐैसे में एक न एक दिन प्रतिष्ठित व्यक्ति की छवि खराब होती है. साथ ही साथ में सहयोग माँगने वाला  भी अपमानित होता है।ऐैसी स्थिति में उन्हे भी मौका मिल जाता है जो विषय वस्तु को समझने की क्षमता भी नही रखते
बिना बात की गहराई को समझे 
 ही अपनी  सलाह देने लग जाते है जिनके सलाह की आवश्यकता नही होती है और वे कुछ भी बोल  जाते  ।
मुझे यह देखकर बहुत ही दुःख होता है  ।की लोग किसी की अज्ञानता का कितना गलत फायदा उठाते हैं ।जो आप के ऊपर अगर  विश्वास करता है ।तो उसे आप जानकारी दें या न दें आपकी मर्जी है ।पर आप उससे विश्वासघात तो न करें।ये आपका व्यवहारिक दायित्व कहता है।


रचनाकार- आशा उमेश पान्डेय
               अम्बिकापुर छग


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