विधा धनुषाकार पिरामिड 

 



वो ,
जाड़ों ,
की  धूप ,
जैसा  प्रिय ,
वो  अपनापन ,
तुम्हारा   रूठना ,
वो हँसना  भी  यार ।
सुनो अब यही तो ,
सुकून  है  मेरा ,
तेरे अनंत ,
प्यार पर ,
किसका ,
जोर ,
 हो,
सुषमा दीक्षित शुक्ला


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