चौबीसवा किताब :  भोजपुरी के तीन गो धार्मिक किताब 

 



प्रस्तुति बिमलेन्दु कुमार पाण्डेय


किताब 1 :  सिरीमद करुनाकर रामायन ( महाकाव्य )  
रचनाकार :  व्रतराज दुबे ' विकल ' 
प्रकाशन :  नित्या श्री प्रकाशन , दिल्ली 
पहिला संस्मरण :  2014 
भाषा :  भोजपुरी 



किताब 2 :  श्रीमदभागवद गीता ( मूल सहित भोजपुरी पद्यानुवाद ) 
अनुवादक :  शास्त्री सर्वेंद्रपति त्रिपाठी 
प्रकाशन :  सर्वेंद्र प्रकाशन , पटना 
पहिला संस्करण :  1977 
भाषा :  संस्कृत / भोजपुरी 


किताब 3 :  श्रीकृष्णार्जुन वार्ता ( श्रीमदभागवद गीता के भोजपुरी गद्यानुवाद )  
अनुवादक :  पाण्डेय कपिल 
प्रकाशन : भोजपुरी संस्थान , पटना 
पहिला संस्करण :  2015 
भाषा :  भोजपुरी 


25 किताबिन के सिरीज में एगो सेक्सन हम जान बुझ के धार्मिक किताबिन के राखल चाहत रहनी ह ।  कारण कि भोजपुरी में धार्मिक काम भइल बा , भोजपुरी में अनुवादो के काम भइल बा , भोजपुरी में भगवान राम प मौलिक काम भी भइल बा आ संगे संगे धार्मिक किताबिन के आपन साहित्य आ लालित्य होला जवना के चर्चा के बिना 25 गो जरुरी किताबिन के इ सिरीज पुरा ना होइत ।  त आज चर्चा एह तीन किताबिन प ।  


सिरीमद करुनाकर रामायन के चर्चा हम पहिलहूँ कइले रहनी , आ एह किताब के कुछ अंश आखर प लागल रहे ।  भोजपुरी में पहिला लिपिबद्ध धार्मिक ग्रंथ जवना के रेकाड मिलेला आ सुने में आइल बा उ ह बाईबिल । अंग्रेज लोग ईसाई धर्म के प्रचार प्रसार खातिर बाईबिल के भोजपुरीनुवाद क के छोट-छोट पुस्तिका भा प्रार्थना के रुप में बांटत रहे ।  आजुओ बनारस में लाल गिरजाघर  अइसन चर्च बा जवना में पिछला 100 साल से उपर से भोजपुरी में प्रार्थना होला ।  अइसे त भोजपुरी क्षेत्र में रामचरितमानस , जवना के भोजपुरिया लोग मानस कहेला आ भागवद गीता के पाठ सदियन से सैकड़न साल से हो रहल बा ।  क हाली त लागेला आ हम कतने लोगन के मुहे सुनले बानी कि मानस भले अवधी में लिखाइल होखे बाकिर रचल बसल बा भोजपुरियन के खुन में । मानस के पाठ के बोले के शैली भोजपुरिया लोग अपना हिसाब से बना ले ले बा आ इहे मानस के भोजपुरिया लोग मारिसस फिजी सरीनाम त्रिनिदाद टोबैगो ले , ले के गइल ।  भागवद गीता के पाठ भी भोजपुरिया क्षेत्र में बहुत आम बात बा आ सबसे बड़ बात कि भागवद गीता के सुनावे वाला पंडी जी भा विद्वान लो भले श्लोक संस्कृत में पढसु लो बाकिर प्राइमरी स्कुल के अध्यापक लेखा समझाई लो भोजपुरिये में ।  


अइसे त भगवान राम आ मानस के किरदार लोगन प अलग अलग चर्चा आ रचना भोजपुरी में मिलेला , महाभारत में भी अलग अलग किरदार प काव्य सिरजना भइल बा , बाकिर श्रीमदभागवद गीता प भोजपुरी में बहुत काम भइल बा ।  जइसे हम एजुगा दू गो किताबिन के जिक्र क रहल बानी एह के अलावा बलिया से ले के भोजपुरी के अलग अलग क्षेत्र में अलग अलग लोग श्रीमदभागवदगीता प काम कइले बा ।  अलग- अलग देवी -देवता , तीज-त्योहार प अनेकन गो किताब लिपिबद्ध बाड़ी स ।  चुकि एह तीनो किताब के हमार एक्सेस बा आ धार्मिक किताबिन के ले के इ तीनो किताब नीमन से रिप्रजेंट क रहल बा‌डी स ।  अब चर्चा किताबिन प ।


किताब 1 :  सिरीमद करुनाकर रामायन ( महाकाव्य )


भोजपुरी में टकसाली शैली में गद्य के बात डा. उदय नारायण तिवारी जी , मुक्तेश्वर तिवारी बेसुध जी के उदाहरण देत बता रहल बानी , बाकिर भोजपुरी के एगो ठेठ रुप में यानि कि जमीन से जुड़ल भोजपुरी के चाव आ साहित्य के भाव के अदभुत संगम एह किताब में बा ।  धर्मग्रंथ के लगभग हर विधा के अपना में समेटले इ किताब असल में भगवान राम के केंद्र में लिखाइल , मानस आ रामायण से मिलत जुलत आ तनि हटि के बा।  एह किताब में विकल जी , भगवान राम के ओहू रुप के वर्णन कइले बानी जवन कबीर के राम हवे , ओहू रुप के जवना में लोग भगवान के देखेला , आ ओहू रुप के जवना में भोजपुरिया समाज आपन सवांग देखेला ।  


एह किताब के अध्याय का अलग अलग खण्ड बा जवना में अलग अलग विषय बा ।  पहिला खण्ड जवना में मंगलाचरण , राम कहानी , कवि परिचय , करुनाकर के भाव में चाव आ राम नाम कथा महातम के पद्य रुप में लिपिबद्ध कइल गइल बा ।  एह के बाद के खण्ड बा - 


1- बाल कांड 
2- अयोध्या कांड  
3- अरन्य कांड 
4- किस्किंधा कांड 
5- सुन्नर कांड 
6- लंका कांड 
7- उत्तर कांड 


हर कांड के आपन अलग अलग विषय बा , विकल जी हर ओह विषय के लिपिबद्ध कइले बानी जवन आम जनमानस में भोजपुरिया क्षेत्र में बहुत प्रचलित बा संगे संगे बहुत बेहतरीन सहज सरल शब्दन में भगवान राम के वर्णन कइले बानी ।  


किताब 2 :  श्रीमदभागवद गीता ( मूल सहित भोजपुरी पद्यानुवाद ) 


एह किताब के भूमिका महेश्वराचार्य जी लिखले बानी ।  उहे महेश्वराचार्य जी जिनिका नावे , भिखारी ठाकुर प पहिला लेख आ पहिला किताब लिखे के उपलब्धि बा ।  एह किताब के भूमिका में इहाँ के बतावत बानी कि त्रिपाठी जी संस्कृत के बहुत बड़ विद्वान रहनी आ देवभाषा संस्कृत से भोजपुरी पद्यानुवाद क के भोजपुरी भाषा-भाषी लोगन खातिर बहुत जरुरी काम कइले बानी ।  एह किताब के बारे में अलग अलग विद्वान लोगन के आपन बात बा जवना में रामनाथ प्रणयी जी के भी लिखल बात बा ।  


18 अध्याय में लिपिबद्ध भोजपुरी में श्रीमदभागवद गीता , साहित्य के नजर से व्याकरण के हर रुप रंग अपना में समेटले बड़ुवे ।  भोजपुरी के अइसना किताबिन के चर्चा भोजपुरिया समाज में काहें कम बा इ हमरा समझ के बाहर के बात बा उहो तब जब भोजपुरिया समाज प्रायोगिक भइला के बादो धर्मभीरु ह । सम्भव बा अइसना किताबिन से अधिकतर लोगन के परिचय ना होखे ।  एह किताब के खासियत बा कि एह में संस्कृत में मूल श्लोक लिखल बा आ ओहि श्लोक के आगे  भोजपुरी पद्यानुवाद बा ।  यानि कि बेर-बेर पन्ना पलट के माने नइखे बुझे के आ संगे संगे संस्कृत के ज्ञान भोजपुरी के संगे होइ ।  हं क जगह संस्कृत के शब्दन के सहज आ सरल करे खातिर त्रिपाठी जी ओह शब्दन के विस्तार दे के मूल बात के बहुत आसानी से समझवले आ बतवले बानी ।  


किताब 3 :  श्रीकृष्णार्जुन वार्ता ( श्रीमदभागवद गीता के भोजपुरी गद्यानुवाद ) 


त्रिपाठी जी के किताब के बाद एह किताब के चर्चा कइल एह से जरुरी बा कि श्रीमदभागवद गीता के संस्कृत श्लोक हो गइल , भोजपुरी में पद्य के सिरजना हो गइल , त फेरु ओह पद्य के गद्याकार बनावत कहानी के रुप में आम जन के करेजा ले चहुंपावे खातिर इ जरुरी हो जात बा ।  पाण्डेय कपिल जी भाषा के जानकार बानी , अनुवादक के काम भी करत रहनी ह एह से श्रीमदभागवद गीता के भोजपुरी साहित्य में ले आवे के आ उहो गद्य में ले आ के एगो नीमन विस्तार देले बानी ।  


हम जब एकनी के पढल शुरु कइनी त समानंतर रुप से पढल शुरु कइले रहनी जवन बहुत रोचक आ आदि से अंत ले ठीक ओइसहीं ले के गइल जइसे कवनो वेब सिरीज ले के जात होखे ।  


किताब 2 आ किताब 3 , भोजपुरी साहित्यांगन प पढे के मिल जाइ ।  करुनाकर रामायन खातिर गुरुजी व्रतराज दुबे विकल जी से कांटेक्ट करे के परी ।  अबहीं त हम इहे कहब कि एह तीनो किताब के रउवा सभ जरुर पढीं , रामचरितमानस , श्रीमदभागवद गीता के पढले बानी भा नइखी पढले , एह किताबिन के जरुर पढीं । एगो अउरी बात एह के संगे जोड़ब कि भोजपुरी भाषा में लगभग हर क्षेत्र में साहित्य लिपिबद्ध भइल बा एहू के बेहतरीन उदाहरण इ तीनो किताब बड़ुवे ।  


जानकारी मिलत रही , शेअर होत रही , भोजपुरी किताब पढल जाउ , भोजपुरी में लिखल जाउ , आ अउरियो लोगन के भोजपुरी में लिखे पढे खातिर प्रोत्साहित कइल जाउ ।  आज के समय में अपना मातृभाषा खातिर इ जरुरी बा ।


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