बरसे दीं

 


गणपति सिंह  छपरा बिहार



बरसे दीं जनी मानी बाउर, 
होई बरखा तबे होई चाउर। 


धरती बाड़ी बड़ी झाझाइल
काहे  बानी सभे अगुताइल
सुखाड़ में तs कुटाई छाउर
बरसे  दीं जनी मानी बाउर। 


भले  गारी दीहीं भगवान के
कचनार होई खेतवा धान के
खुबे होई किसान के चाउर
बरसे दीं जनी मानी बाउर। 


सगरो रहे धूरा उड़त भाई
चिड़ई  चुरूंग राहत पाई
गंउआ ठीक सहरवे बाउर
बरसे दीं जनी मानी बाउर। 


भले सहरवे में  कचरा बा
गउंआ में नाहीं लफड़ा बा
गारी दी सरकार के आउर
बरसे दीं जनी मानी बाउर। 


कतने दिन पर मिलल पानी
भइल अगुती  पछुती  पानी
गणपति के छपके दी आउर
बरसे  दीं जनी मानी बाउर। 


©️®️गणपति सिंह
     छपरा बिहार


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