मेरा शहर

 


पद्मा मिश्रा

स्वप्नदर्शी जमशेदजी की कल्पना साकार है,

'शत -रंग' की दुनियाबसाए,गुलजारहै मेरा शहर.

स्वर्णरेखा और खरकाई , की धारा में सजल,

नील नभ में मुस्कराता चाँद है मेरा शहर.

हर तरफ नाकामियों के शोरसे बरपा कहर,

पर 'जिन्दगी जिन्दादिली का नाम है मेरा शहर.

श्रम जहाँ साकार होता,कर्म की जलती मशाल,

इस्पात सी दृढ़ता ,ह्रदय का साज है मेरा शहर.

संघर्ष की माटी में जन्मे हैं कमल से लाल भी,

जूझती 'युव-शक्ति' की पहचान है मेरा शहर.

खिलखिलाती सुबह सी, उम्मीदें होती हैं जवान,

हौसलों की जीत है ,अनुराग है मेरा शहर.

मंदिरों में आरती, मस्जिद में गूंजी है अजान,

गंगा जमुनी संस्कृति का ''फाग' है मेरा शहर,

बाइबिल, कुरआन, गुरुवाणी की गूंजी है'सदा'

सबल, सक्षम एकता का गान है मेरा शहर

बहुल, भाषा धर्म का अद्भुत समन्वय है यहाँ,

झारखंडी सभ्यता का साज है मेरा शहर

छु सकें ऊचाईयां ,हाथों में इतना दम तो है,

मेरे सपनों का सजीला बाग़ है मेरा शहर.

पद्मा मिश्रा

 जमशेदपुर झारखंड

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