पाठकीय प्रतिक्रिया दि ग्राम टुडे मासिक साहित्यिक ई पत्रिका



डाॅ बिपिन पाण्डेय

दि ग्राम टुडे मासिक साहित्यिक ई पत्रिका का द्वितीय अंक प्राप्त हुआ। पत्रिका का यह अगस्त का अंक आज़ादी और सावन को समर्पित है। पत्रिका के मुखपृष्ठ को देखकर सहज रूप में इस बात का अनुमान लगाया जा सकता है। नए कलेवर और तेवर में प्रस्तुत यह अंक अत्यंत सुंदर और आकर्षक है।इसमें जहाँ एक ओर देशभक्ति और देश प्रेम से संबंधित ओजपूर्ण रचनाएँ हैं तो दूसरी ओर सावन की मादकता का संचार करती प्रेम एवं श्रृंगार से ओत-प्रोत रचनाओं को स्थान दिया गया है।इतना ही नहीं इस अंक में वात्सल्य तथा प्रकृति प्रेम की रचनाएँ अपने वैशिष्ट्य को उजागर करती हैं। विषय वैविध्य और विभिन्न भाव-भंगिमाओं से युक्त रचनाएँ बरबस ही पाठक का मन मोह लेती हैं। उदाहरण स्वरूप किसी एक कवि की  रचना एवं उसकी पंक्तियों को उद्धृत करना उचित नहीं प्रतीत होता।पत्रिका में प्रकाशन हेतु रचनाओं का चयन अत्यंत सावधानीपूर्वक किया गया है।

इस अंक की कुछ रचनाओं में वर्तनीगत अशुद्धियाँ हैं जो किसी भी साहित्यिक पत्रिका के लिए उचित नहीं है।पत्रिका  में कुछ कहमुकरियों को भी जगह दी गई है।यह एक सार्थक कदम है परंतु कथ्य एवं शिल्प की कसौटी पर एक भी कहमुकरी खरी नहीं उतरती। आशा ही नहीं वरन पूर्ण विश्वास है कि सुधी संपादक मंडल आगामी अंकों में रचनाओं की वर्तनी एवं शिल्प संबंधी अशुद्धियों को दूर करने का प्रयास करेगा। पत्रिका में प्रकाशित सभी रचनाकारों एवं संपादक मंडल को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ !!

डाॅ बिपिन पाण्डेय 

रुड़की।

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