गज़ल

 


हरप्रीत कौर

बिन तुम्हारे कोई दिन गुजरता नही।

जख्म ऐसा लगा है जो भरता नहीं।।


 याद करते हुए दिल ये थकता नहीं।

आंखो से अक्स भी तेरा झरता नही।।


बेकरारी को मिलता नहीं चैन अब।

जब ये दिल बिन तुम्हारे धड़कता नही।।


  बिन तेरे रातें सूनी सी लगतीं सनम।

क्यों तुझे प्रीत का दर्द दिखता नहीं।।


हरप्रीत कौर

शाहदरा, दिल्ली

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