पर्यावरण दिवस पर प्रियंका दुबे 'प्रबोधिनी' के दोहे


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आम, नीम पीपल लगे, तुलसी हों भरपूर।

रहो प्रकृति की गोद में, मत जाना अब दूर।।


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ईश्वर की यह नेमतें, रखिए आज़ सँभाल।

वर्षा जल संचित करो, जीवन हों खुशहाल।।


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ताप सभी हरते सदा, हरते मनु सब रोग।

आओ रोपें वृक्ष अब, मिल-जुलकर हम लोग।।


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संचय जल चहुँओर हो, धानी हो परिधान।

कंचन सी धरती दिखे, खूब बढ़े धन-धान।।


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कहती सदा 'प्रबोधिनी',  विनती है कर जोर।

पर्यावरण बचाइये, गूंजे जग खग शोर।।


प्रियंका दुबे 'प्रबोधिनी'

गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।।

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