साधारण जीवन शैली से जीवन को जय करे

 

मंजूरी डेका

  “यह संसार प्रकृति के नियमों के अधीन है

  और परिवर्तन एक यात्रा, नियम है

  शरीर तो मात्र एक साधन है

  इसे एक दिन प्रकृति में विलीन होना ही है ….”

  विज्ञान का छात्र तथा असमिया साहित्य के प्रति संपूर्ण समर्पित साहित्य अकादमी, सरस्वती, पद्मश्री आदि सम्मान से सम्मानित सन 1932 में नगांव जिला,असम में जन्मे असमिया साहित्याकाश का उज्जवल नक्षत्र डा लक्ष्मी नंदन बरा जी के मृत्यु के साथ -साथ जैसे एक युग का अंत हुआ। कोरोना महामारी ने हमारे बीच में से एक के बाद एक ऐसे महान अभिभावक स्वरूप मनीषियों को छीना है जिसकी रिक्तता अपूरणीय है ।

     असम साहित्य सभा के भूतपूर्व सभापति डा बरा जी को मृत्यु के कुछ दिन पहले एक साक्षात्कार में इतने उम्र में भी इतने स्वास्थ होने का राज पूछने पर उन्होने बताया था कि--- वे नियमित रूप से अपनी पसंदीदा काम लिखना -पढ़ना, नियमित व्यायाम - प्राणायाम करना, किसी भी परिस्थिति में कम उद्विग्न होना और जीवन में लेखन कार्य के द्वारा मिली सफलताएं उनकी स्वास्थ जीवन धारण की सोपान रही है। सभी तरफ से समर्थवान होने के बाद भी एक अत्यंत साधारण जीवन शैली को अपनाने वाले इस महामानव ने भले ही करोना की युद्ध में करोना को जय नहीं कर पाए लेकिन हमें नियमत, साधारण तथा कम उदिग्नतापूर्ण जीवन शैली से अपने जीवन को किस तरह जय किया जासकता हैं उसका मूल मंत्र देकर गए हैं। ऐसे महानात्मा को उनकी आद्यश्राद्ध के दिन विनम्र श्रद्धांजलि ज्ञापन करती हूं। हे महामानव आपको शत: शत: नमन🙏🏻🙏🏻।


मंजूरी डेका

शिक्षिका

विश्वनाथ, असम

(स्व लिखित, अप्रकाशित)

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