एक कुण्डली


रोशनी किरण

_सूखा उपवन भी खिला , पाकर तुमरा प्यार ।

            ऐ गुरुवर मेरे तुम्हीं , एक तुम्हीं दातार ।।

            एक तुम्हीं दातार , और ना कोई मेरा ।

            दें चरणों में छांव , यही है मेरा डेरा ।।

          कहे " किरण " कर जोर , प्रभू मन मेरा भूखा ।

          दर्शन दे दें आप , खिले मन , उपवन सूखा ।।


    ______ रोशनी किरण ( मुंबई )

                  १ जून २०२१

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