आत्मसम्मान

 

हरप्रीत कौर

एक औरत का सब्र

तब टूटता है,जब सवाल

उसके आत्मसम्मान पर उठता है,

अपने सम्मान की खातिर

अपनों से लड़ना पड़ता है,

जब अपने ही उठाते है उस पर उंगली,

सब पराया लगने लगता है,

अपने सपनों को मारना पड़ता है,

दिल रोता है,तड़पता है,

अगर माएं सीखा दे बेटों को

औरतों की इज्जत करना,

तो उनकी ये हालत न होगी।

अगर मर्द भी करने लगे औरतों

का सम्मान,

तो औरतों पर कोई मुसीबत न होगी।

कुछ औरतों से शिकायत है हमें,

अगर तुम खुद की इज्जत नहीं करोगी,

तो तुम्हारी इज्जत भी नही होगी।

अपने आत्मसम्मान की रक्षा के लिए,

हमे झुकना नहीं लड़ना होगा,

अपने सपनों को मारना नहीं,

सपनों को साकार करना होगा।

आत्मनिर्भरता से ही आत्मसम्मान

मिलता है,

हमें आत्मनिर्भर होना होगा।

हरप्रीत कौर

शाहदरा, दिल्ली

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