कंधे को रस्ता बनाते है

 

बिम्मी कुँवर

हुस्नों इश्क पे गुमां ज्यादा मत करना,

सुना हैं मौसमों से जमती हैं यारी इनकी।



थामना हाथ उतना ही कि डूब मत जाना,

कंधे को रस्ता बनाने की रहती तैयारी इनकी।


बेवफा लोगों पे हद से ज्यादा रहम करना,

सुना है भीतर से जर्जर होती है महल अटारी इनकी।


चंचल नयनों से चिकनी चुपड़ी बातें वो करेगें, हरकत मत करना,

वरना! घायल होने पर ही दिखती है कटारी इनकी।


इनसे इन्सानियत, रिश्ते नाते, दुख-सुख सांझा मत करना,

दिखावा, लूटपाट, तेरी मेरी और मैं ही मैं है दुनियादारी इनकी।


बिम्मी कुँवर

हिन्दी भोजपुरी लेखिका

सिलीगुड़ी

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