मेरी बेटी मेरा सम्मान

 

ओम प्रकाश श्रीवास्तव ओम


नाम है उपलब्धि उपलब्धियों की खान है,

मेरी सोनपरी उपलब्धि ही मेरा सम्मान है।



 रोज सुबह जब वह रानी बेटी जगती है,

पूरे घर में मधुर खुशबू सी वह बिखेरती है।


बाबा दादी ताऊ ताई की बहुत प्यारी है,

पूरे परिवार की उपलब्धि राज दुलारी है।


मान्यता उपलब्धि लक्ष्मी शारदे की रूप है,

दोनों ही बेटियां वैभव और बुद्धि स्वरूप हैं।


चाचा चाची पापा मम्मी के आंख की तारा,

घर में उपलब्धि दमके जैसे हो एक सितारा।


ईश्वर की बड़ी कृपा श्रीवास्तव कुल ने पाई,

अर्चिका उपलब्धि मान्यता मेरे घर में आई।


पाकर रत्नों को हमसबका जीवन धन्य हुआ,

ओम विष्णु ने माँ शक्ति के चरणों को छुआ।


माता शक्ति अपनी कृपा सदा ही बनाये रखना,

अपने पुत्रों को संकटों से सदा ही बचाये रखना।


ओम प्रकाश श्रीवास्तव ओम

तिलसहरी, कानपुर नगर

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