मनोदैहिक समस्याएं एवं उसका समाधान* विषय पर राष्ट्रीय वेबीनार का आयोजन

 मनोदैहिक विकारों के लक्षण पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में अधिक पाए जाते हैं : डॉ मनोज कुमार तिवारी

बिलासपुर। अटल बिहारी बाजपेई ट्रस्ट, बिलासपुर, छत्तीसगढ़ द्वारा *कोरोना महामारी के दौरान मनोदैहिक समस्याएं एवं उसका समाधान* विषयक एक दिवसीय नि:शुल्क राष्ट्रीय वेबीनार का आयोजन किया गया जिसमें मुख्य अतिथि व मुख्य वक्ता के रूप में वेबीनार को संबोधित करते हुए डॉ मनोज कुमार तिवारी, वरिष्ठ परामर्शदाता, ए आर टी सेंटर, एसएस हॉस्पिटल, आई एम एस, बी एच यू वाराणसी ने बताया कि सामान्य समय में 14% लोगों में मनोदैहिक विकार दिखाई पड़ता है। मनोदैहिक विकार मध्यम सामाजिक आर्थिक स्तर के लोगों में 17%, निम्न सामाजिक आर्थिक स्तर वाले लोगों में 10% तथा उच्च सामाजिक-आर्थिक स्तर के लोगों में 15% पाया जाता है। मनोदैहिक विकारों के लक्षण पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में अधिक पाए जाते हैं। आजकल कोरोना के भय एवं लाँकडाउन के कारण घर में ही रहने के कारण लोगों में मनोदैहिक समस्या अधिक पाई जा रही है। मनोदैहिक विकार में व्यक्ति शारीरिक लक्षण बिना किसी जैव-शारीरिक कारणों के ही महसूस करता है। व्यक्ति के सभी जांच रिपोर्ट सामान्य आते हैं।


मनोदैहिक समस्याएं व्यक्ति में मनोवैज्ञानिक संकट की शारीरिक अभिव्यक्ति है। जब व्यक्ति के मन में कोई परेशानी होती है और व्यक्ति उससे निपटने में सक्षम नहीं होता है तो दिमाग उसे नकारात्मक भावना में बदल देता है जिसका प्रभाव व्यक्ति के शरीर पर पड़ता है। यह परेशानी जितनी गंभीर और लंबे समय तक चलने वाली होगी उसका दुष्प्रभाव भी शारीरिक लक्षण के रूप में उतनी ही गंभीर दिखाई पड़ेगी। कोरोना के संक्रमण के बारे में लगातार गंभीर सोच विचार करने तथा इसे तनाव के रूप में मन में बने रहने के कारण लोग मनोदैहिक विकारों को महसूस करने लगते हैं।


डॉ मनोज तिवारी के अनुसार कोरोना महामारी में लोगों में गले में खराश महसूस करना, जोर लगाकर खाँसने का प्रयास करना, शरीर गर्म (बुखार) होने की शिकायत करना जबकि बुखार नापने पर शरीर का तापमान सामान्य होता है, पेट में दर्द की शिकायत करना, सीने में भारीपन महसूस करना, अत्यधिक पसीना होना, मुंह व गला सूखना, बार-बार दस्त महसूस होना, सिर दर्द, चक्कर जैसा महसूस करना, हाथ पैर में झुनझुनी होना या ठंडा गर्म महसूस करना, यौन समस्याएं जैसे मनोदैहिक लक्षण दिखाई पड़ रहे हैं।


कोरोना महामारी में मनोदैहिक समस्याओं से बचे रहने के उपायों की चर्चा करते हुए डॉ मनोज तिवारी ने बताया कि कोरोना से जुड़ी खबरें हर समय न सुने और न देखें, परिवार के सदस्यों, परिचितों, मित्रों एवं रिश्तेदारों से केवल कोरोना के बारे में ही बातचीत न करें बल्कि कुछ अच्छे एवं सकारात्मक समाचार पर भी चर्चा करें, गूगल एवं सोशल मीडिया पर कोरोना संबंधी अधिक जानकारी इकट्ठा करने का प्रयास न करें, शरीर और मन दोनों को पर्याप्त आराम दें, अपने दिनचर्या को नियमित रखें, रात में सोने से पहले कोरोना सम्बन्धी सूचना को देखकर, सुनकर या पढ़कर न सोए, नियमित व्यायाम करें, रिलैक्सेशन एक्सरसाइज करें, योग व मनन करें, पूजा करें, घर के सदस्यों के साथ आगे की योजनाएं बनाएं, घर में बच्चे हो तो उनके साथ उनके पढ़ाई के मुद्दों पर चर्चा करें, उनके साथ खेलने का प्रयास करें और अपने बचपन के दिनों में खो जाए, अपने पसंद व रुचि का काम करें, ऐसे लोगों एवं सोशल मीडिया पर दूरी बना लें जो आपको दहशत में डालने वाली बातें अधिक करते हैं, अकेले हैं तो डायरी लिखें, कविता लिखें, कहानी लिखें व पढें, अपने अच्छे दिनों को याद करें, अच्छी फिल्में देखें, अपने जीवन की यादगार फोटो देखें, मनपसंद गाने सुने, सोशल मीडिया के माध्यम से अपनों से जुड़े रहें, अपनी सोच को सकारात्मक बनाए रखें, सोचे कि यह समय शीघ्र ही समाप्त हो जाएगा पुनः हम लोग अपना जीवन सामान्य ढंग से जी सकेंगे, बच्चे गुदगुदी खेलें।


डॉ तिवारी ने मनोदैहिक विकार से पीड़ित व्यक्तियों के परिजनों को भी कुछ सावधानियां रखने का सुझाव दिया। पीड़ित व्यक्ति से यह न बोलें कि "यह केवल तुम्हारा नाटक है" ऐसा कथन पीड़ित व्यक्ति के समस्याओं को और बढ़ा देगा, पीड़ित व्यक्ति को दर्शाते रहे कि आपकी परेशानी को हम समझते हैं, ध्यान, योग, पूजा ध्यान इत्यादि करने में सहयोग प्रदान करें, पीड़ित व्यक्ति के दिनचर्या में सुधार करने तथा उसको नियमित बनाए रखने में सहयोग प्रदान करें, उन्हें सकारात्मक सूचनाएं प्रदान करें, उनसे कहे की हम लोग आपके साथ हैं, सावधानियां रखकर के इस महामारी से आसानी से बचा जा सकता है।

वेबीनार में देश के लगभग सभी राज्यों से लोगों ने सहभागिता किया तथा प्रश्नों के माध्यम से मनोदैहिक समस्याओं का समाधान प्राप्त किया। वेबीनार के सफल आयोजन में अटल बिहारी वाजपेई ट्रस्ट के प्रेम प्रकाश तिवारी महासचिव, परेश गौतम तकनीकी प्रबंधक, गणेश प्रसाद तिवारी एवं प्रशांत दुबे की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वेबीनार का संचालन एवं अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री जी पी तिवारी द्वारा किया गया। वेबीनार में सहभागिता करने वालों को ई- प्रमाण पत्र प्रदान किया गया।

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