कुछ समसामयिक हिंदी मुक्तक


अखिलेश्वर मिश्र

समय विपरीत है, हिम्मत से हमसब हल निकालेंगे,

नहीं संभव अगर हल आज, तो हम कल निकालेंगे।

समस्या है तो हल होगा, नहीं इसमें कोई शक है,

लगेंगे हौसलों से जब, मधुर हम फल निकालेंगे।।


कोरोना का कहर कब तक रहेगा, जाएगा एक दिन,

समय विपरीत है, अनुकूल भी हो जाएगा एक दिन।

जरा सा धैर्य, संबल और साहस की जरूरत है,

हमारा पहले का सौहार्द, वापस आएगा एक दिन।।


समय के आगे सब कोई, सदा बौना नजर आता,

समय से पहले भी कोई, यहाँ कुछ भी नहीं पाता।

समय से ठोकरें खा कर, कोई गलती नहीं करना,

समय लेता परीक्षा है, हमारे धैर्य साहस का।।

@✍️🙏

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