अपनों ने फिर अपनों को खोया है

 


दीपक शुक्ल 'चिराग'

समय तो है कठिन मित्रों धैर्य तो फिर भी रहना है।

वक्त के ज़ख्मों को यारों हमें अब तो सहना है।।

विधाता आज तूने हवा में क्या गरल बोया है।

खुद मैंने ,कई अपनों ने फिर अपनों को खोया है।

विगत एक माह से हर संदेश पर अब डर लगा लगने।।

हर एक जन हो सलामत और स्वस्थ हों सभी अपने।

प्रभु कुछ अब तो ऐसा करदो 

कि तेरी जय-जयकार हो।

खत्म अब वेदना और ये हाहाकार हो।।

अब न रह जाए कोई विष इन हवाओं में।

कोई न वेदना का स्वर गूंजे इन फिजाओं में।।

@

सर्वाधिकार सुरक्षित


🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩

🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏


दीपक शुक्ल 'चिराग'

संस्थापक

काव्यांजलि "एक अनूठा आरंभ"

विश्व मंच

🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩

Popular posts
अस्त ग्रह बुरा नहीं और वक्री ग्रह उल्टा नहीं : ज्योतिष में वक्री व अस्त ग्रहों के प्रभाव को समझें
Image
गाई के गोवरे महादेव अंगना।लिपाई गजमोती आहो महादेव चौंका पुराई .....
Image
परिणय दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं
Image
बाराबंकी के ग्राम खेवली नरसिंह बाबा मंदिर 15 विशाल मां भगवती जागरण बड़ी धूमधाम से मनाया गया
Image
सफेद दूब-
Image