मास्क और दूरी आंचल की छांव भी जरुरी

इस मदर्स डे पर हर बच्चा अपनी मां के आंचल की छांव में सुरक्षित रहें। जहां पूरा देश इस भीषण त्रासदी से जूझ रहा है सभी अपने घर में रहने को मजबूर हैं मैं भी अपने पति और बच्चों के साथ घर में सकारात्मक माहौल बनाते हुए रह‌ रहे हैं ।परंतु पिछले महीने कुछ आवश्यक कार्य से देवघर गई वहां से आने के पश्चात मुझे हल्का सर्दी जुकाम महसूस होने लगा हालांकि सर्द गर्म की परेशानी हरेक साल इस महीने में सताती थी परंतु इस बार भय था कि कहीं मैं कोरोना के चपेट में तो नहीं आ गई। एक-दो दिनों के बाद ही बुखार, सर्दी ,खांसी ,उल्टी तथा लूज मोशन एक साथ हमला कर दिया पूरा शरीर मानों टूटने लगा। अगले ही दिन मेरे दोनों बच्चों अमन और आर्यन को भी बुखार आ गया।मैं बायोकेमिक होम्योपैथी की डॉक्टर हूं ।अतः मैंने तुरंत होम्योपैथिक और बायोकेमिक की दवाईयों का सेवन लक्षण अनुसार प्रारंभ कर दिया। कुछ जरूरी दवाइयों का लिस्ट बनाकर जिस होमियो हॉल में मैं बैठती थी उन्हें व्हाट्सएप कर दिया जिसे साथी डॉक्टर ब्रजेश मंडल ने दरवाजे तक पहुंचा दिया। अगले दिन मेरे पति श्री विश्वनाथ शर्मा को भी बुखार आ गया। यह हटिया में रेलवे में कार्यरत हैं। रेलवे चिकित्सक से परामर्श तथा दवाई लेने के बाद हम सभी घर में आइसोलेट हो गए। पहले दिन से ही हम चारों के बिस्तर और जरूरत के सामान अलग कर घर में भी दूरी बनाकर मास्क लगाकर रहने लगे। इस कष्टमय समय में हम सभी एक-दूसरे की हिम्मत बने रहे और एक दूसरे का ध्यान रखें रहे। बच्चों का बुखार तीसरे ही दिन उतर गया। परंतु मेरा और मेरे पति का बुखार और कमजोरी से बहुत बुरा हाल था ।भूख बिल्कुल खत्म हो चुकी थी, परंतु हमलोग हिम्मत रखते हुए कोरोना को मात देने के लिए कमर कस चुके थे। और इस जंग को जीतने के लिए दवाइयों के साथ-साथ मानसिक तौर पर भी तैयार हो चुके थे। थोड़ी-थोड़ी मात्रा में सुपाच्य भोजन, फल, जूस ,नारियल पानी तथा काढ़ा का सेवन हमनें करना प्रारंभ किया और दिन में दो तीन बार भांप लेने लगे होम्योपैथिक बायोकेमिक की दवाओं के साथ-साथ एलोपैथी कि कुछ जरूरी दवाएं तथा मल्टीविटामिन दवाएं भी हम लोगों ने समयानुसार लेना प्रारंभ किया। सकारात्मक सोच रखते हुए हम लोग एक दूसरे को हौसला बंधाए एक दूसरे का संबल बनें रहें ।नौ- दस दिनों में हमारी समस्याएं खत्म हो गई और धीरे धीरे हम स्वस्थ हो गए। स्वस्थ होने के बाद भी हम लोग घर में ही रहते हैं।इनडोर गेम्स और अंताक्षरी खेल कर जोक्स और पुराने समय की मजेदार संस्मरण सुनाते दिन व्यतीत करते रहे। इस तरह हम दूरी बनाए रखते हुए भी दिलों से नजदीक होते गए।

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