जै श्री हरि

बिजेन्द्र कुमार तिवारी

सब कुछ करता है वही, हेतु बने सब लोग,

यश-अपयश को भूलकर, यतन करो यतयोग।

कर्ता-धर्ता है वहीं,वो हीं तारणहार,


उसकी किरपा के बिना, कोउ न पाया पार।

उससे नेह लगाय के, कर सत्कर्म विचार,

उसके सुमिरन से सदा, पातक कटे हजार।

सिरजन करता है वहीं, वो हीं करता नाश,

सबका मालिक एक वो, उसपे कर विश्वास।

रे बंदे उसपे कर विश्वास....।।

बिजेन्द्र कुमार तिवारी

🙏बिजेन्दर बाबू🙏

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