!!मेरा हृदय उद्गार!!

गिरिराज पांडे 

तू मेरी जान मे बस कर बने हो जान अब मेरी

 तुमसे दूर रहकर के सही जाती ना अब दूरी 

सदा ही पास रहते हो तो मेरा दिल बहलता है 

हुए यदि तुम जरा ओझल तो मेरा दिल मचलता है

 तेरे इस रूप में मुझको तो अब बस प्रेम दिखता है

 लुटा दो प्रेम अब मुझ पर मेरा तो दिल ये कहता है 

रखे हो अपने होठों पर गजब मुस्कान एक प्यारी

 उसे अब देखू मैं हरदम तेरी लीला बडी न्यारी 

लगाकर होठों से अपने हमेशा बंसी को रखो 

सदा ही प्यार तेरा अब मिले हर रोज बंसी को 

यही इच्छा मेरे दिल की कभी इंकार मत करना 

रहो अब साथ में मेरे तो जग से फिर नहीं डरना

 तुम्हारे मोहनी इस रूप में गजब की चंचलता

 इसे ही देखकर अब तो मिलती दिल को शीतलता

 सदा ही मैं तुझे देखूं तुम मेरे पास हरदम हो 

यही इच्छा मेरी हरदम तुम ही तो श्याम मेरे हो

 जो बंसी को बजाते हो तो मेरा दिल धड़कता है 

अगर तुम शांत रहते हो तो इसमें प्रेम दिखता है 


गिरिराज पांडे 

वीर मऊ 

प्रतापगढ़

 9565 940 499

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