ईद

नूर फातिमा खातून नूरी 

सेवई में अब वो मिठास नहीं,

पहले सा ईद का एहसास नहीं।



ना किसी के घर जा सकते,

ना किसी को बुला सकते,

ना ही हाथ मिला सकते,

ना जी भर गले लगा सकते,


पास रहकर भी पास नहीं,

पहले सा ईद का एहसास नहीं।


तन्हा ,चुपचाप पड़े है घर में,

कैसी उदासी है हर नज़र में,

हवाएं घुल रही है ज़हर में,

सुकून गांव में ना शहर में,


आज तो कुछ भी खाश नहीं,

पहले सा ईद का एहसास नहीं।


नूर फातिमा खातून नूरी 

शिक्षिका

 जिला-कुशीनगर

उत्तर प्रदेश


Popular posts
भोजपुरी भाषा अउर साहित्य के मनीषि बिमलेन्दु पाण्डेय जी के जन्मदिन के बहुते बधाई अउर शुभकामना
Image
दि ग्राम टुडे न्यूज पोर्टल पर लाइव हैं यमुनानगर हरियाणा से कवियत्री सीमा कौशल
Image
दि ग्राम टुडे न्यूज पोर्टल पर लाइव हैं लखीमपुर से कवि गोविंद कुमार गुप्ता
Image
दि ग्राम टुडे न्यूज पोर्टल पर लाइव हैं अनिल कुमार दुबे "अंशु"
Image
पापा की यादें
Image