ग़ज़ल / गीतिका

 



मणि बेन द्विवेदी

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दिलों में पाक चाहत का यही एहसास काफी है !

खिलें हो फूल हसरत के हमेशा पास काफी है !!

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तुझे चाहा बड़ी शिद्द्त से,क्या प्रमाण दूँ इसका !

रहे साँसों में मेरी तूँ यही बस आस काफ़ी है !!

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जिधर देखूं उधर बस तूँ ,तूँ हीं तूँ नज़र आये!

हमेशा तूँ हो मेरी ज़िन्दगी में ख़ास काफी है !!

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रहे तूँ दूर कितना भी,मोहब्बत बस तुझी से है!

दिलों में मैं ही हूँ तेरे,यही बिश्वास काफी है !!

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हूँ भरती मांग मैं अपनी ,तेरी चाहत की लाली से !

तेरे ही नाम से चलती, मेरी ये सांस काफी है !!

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@@ मणि बेन द्विवेदी

वाराणसी उत्तर प्रदेश

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