हमारी संस्कृति और सभ्यता

नफे सिंह योगी

            नैतिक शिक्षक हैं पिता,माँ सागर संस्कार ।

            निज भाषा से सभ्यता, बेटी है तो प्यार।।        

            हिंदुस्तान एक ऐसा देश है जहाँ पर सबसे पहले सभ्यता का जन्म हुआ। यहाँ की संस्कृति विश्व में सबसे विख्यात और जानी-मानी संस्कृति है। जिस में निहित हैं देश के प्रति समर्पण की भावना, प्रकृति से प्रेम, नदी तालाब पेड़ों की पूजा, सादगी, ईमानदारी, वफादारी ,अनुशासन, मानवता, नैतिकता, पुरुषार्थ करने की पराकाष्ठा, हवन, पूजा, योग ,प्रार्थना, सहयोग, सहायता, भाईचारा, नारी सम्मान,प्रेम भावना, आदर सम्मान एवं शिष्टाचार आदि।         

          जब से पश्चिमी सभ्यता की महामारी आई है मेरे देश में कोई अछूता नहीं रहा। अश्लीलता का नंगा नाच सरेआम होने लगा, भ्रष्टाचारी, दिखावा, छल कपट और बेईमानी ने धीरे-धीरे हमारी देश की संस्कृति को अपने पैरों तले दबा लिया। सादगी का साँस घोट दिया।ठीक इसी प्रकार संस्कारों का भी वही हाल हुआ।

 सुबह उठकर धरती माँ व मात - पिता के चरण स्पर्श करना , नहाधोकर, योगकर ,पूजा पाठ करना और फिर विद्यालय जाना व अपना व्यवसाय करना सब छूट गया। कोई अखबार ऐसा नहीं आता है जिसमें भ्रूण हत्या, दहेज प्रथा वृद्ध माता- पिता की दयनीय दुर्दशा का बखान नहीं होता हो । माँ-बाप बट रहे हैं, बहन भाई आपस में लड़- लड़कर कट रहे हैं। गुरु के नाम पर काले धंधे हो रहे हैं। कहीं सरेआम बाजारों में लूटाखोस , चोरी डकैती तो कहीं चौराहों पर बलात्कार। यह सब देखने के बाद महसूस होता है कि संस्कृति और संस्कार हम से अब सो कोस पीछे छूट गए।

          शिक्षा केवल धन उपार्जन के लिए प्रयोग में लाई जा रही है। शिक्षा के साथ संस्कारों का हाथ छूट चुका है और एक व्यवसाय बन चुकी है जिसके नाम पर लूटा जा रहा है। नहीं वो गुरुकुल ,नहीं वो पाठशालाएँ जहां पर शिक्षा के साथ संस्कारों का समन्वय होता था। रामायण, महाभारत के चर्चे और कहानियाँ दादी ,नानी बच्चों को सुनाया करती थी। विद्यालयों में वेद पुराण एवं संस्कृत पढ़ाई जाती थी ,जिनमें संस्कार निहित तो होते थे। आज कोई संस्कृत पढ़ कर खुश नहीं है क्योंकि पैसे कमाने का स्कोप नहीं है। टूट गए संयुक्त परिवार और भाईचारा जो ब्याहशादी और त्योहारों पर एक मिसाल हुआ करता था सहयोग और सहायता की।


           अगर हमें अपनी संस्कृति और संस्कारों को बचाना है तो हमें सनातन धर्म के अनुसार भगवत गीता, वेद, पुराण आदि के साथ-साथ संस्कृत भाषा में भी रुचि रखनी होगी। योग विज्ञान, गुरुकुल शिक्षा पद्धति एवं अपने देश के प्रति समर्पण की भावना को अपनाना होगा। इसके साथ-साथ नारी सम्मान, दया ,सहानुभूति सहायता एवं मानवता को गले लगाना होगा,संयुक्त परिवारों को फिर से जिंदा करना होगा ,शहरीकरण को रोकना होगा ,गाँव को स्वर्ग बनाना होगा। अपनी भाषा को अपनाना होगा और अपनी सभ्यता पर गर्व करना होगा। आओ हम सब मिलकर अपने देश की संस्कृति एवं संस्कार को सुरक्षित रखें और अपने देश को विश्व गुरु के साथ-साथ एक संस्कारी राष्ट्र बनाएँ।


नफे सिंह योगी मालड़ा © 

 महेंद्रगढ़ हरियाणा

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