हम जीतेंगे....एक दिन...

 

निर्भय शुक्ला

#आइये_ना!

ये आज न! कल को बीत जाएगा... 

यह वक्त भी गुजर जाएगा...

सही में देखिएगा... कल एक नया सवेरा होगा... और हां कल को यह जरूर लिखा जाएगा कि हमने भयंकर कोरोना महामारी को परास्त कर दिया। लेकिन लेकिन लेकिन... जबतक यह महामारी है आइये ना कुछ अलग करते है!


आइये ना!

उन दोस्तो का नम्बर ढूंढते है जिनसे हम कभी बात न किये थे...

आइये ना!

उन पुराने दोस्तो को कॉल करके कहते है, अबे यार! पहचाना नही!

आइये ना!

उनसे बात करते हुए वे पुरानी बातें सांझा करे जो हमने साथ साथ किया था...

आइये ना!

उन पुराने दोस्तों को खोजा जाए...नए दोस्त तो हर रोज बनाते होंगे हम सब लेकिन उन्हें कॉल कर उनसे बतियाया जाए।

आइये ना!

उन दोस्तो से अपने हर पल को सांझा किया जाए...

आज नही तो कल यह महामारी खत्म हो जाएगी।हम सब पहले जैसे अपने कामो में व्यस्त भी हो जाएंगे तो आइए न तबतक हम उन दिनों में वापस चला जाये।

यकीनन आपका वह पुराना दोस्त चाहे जिस किसी परिस्थिति में भी होगा आपके अचानक एक फोनकॉल से उसको एक ऊर्जा मिलेगी उसे एहसास होगा की उसका दोस्त उसके साथ है...

कल को वह यह जरूर कहेगा कि जब सारी दुनिया कोरोना से झूझ रही थी तब मेरा एक दोस्त मुझे कॉल कर मेरा हाल चाल जान रहा था।निश्चित तौर पर एक नयापन एहसास होगा उसके लिए,मेरे लिए,आपके लिए... हम सबके लिए...

पचास सालो में पचास दोस्त बनाना आसान है लेकिन पचास सालो तक एक दोस्त से दोस्ती निभाना शायद कठिन है...

तो आइए ना उन पुराने दिनों में चला जाये।

हम जीतेंगे....एक दिन...

#निर्भय शुक्ला

बड़हलगंज , गोरखपुर

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