गाँव की याद आती है

कमल राठौर साहिल

वो गांव के परिंदे

शहर की भाग दौड़ में 

थक कर जब चुर हो जाते है

तब गाँव की यादों को 

सीने से लगाये तरसते है 

चूल्हे की रोटी को

सिलबट्टे पे बनी 

लहसुन की चटनी को।

वो पेड़ की ठंडी छाव को

 दादी नानी की लोरी को

कुँए के ठंडे पानी को

जिस को पीकर आत्मा

 तृप्त हो जाती थी

ओर ये शहर की प्यास 

पानी से भी नही बुझती।


याद आती है वो गाँव की यादें

जहाँ अपना सब छुट गया

इस शहर ने सिर्फ पेट भरा

मगर दिल में सब कुछ 

सुनापन कर दिया।


शहर की चांदनी रातें भी

 अब मुझ को नहीं लुभाती है

शहर का सन्नाटा कानो को

 खाने को दौड़ता है


वो रात में अलाव जलाकर 

 रात भर बतियाना

वो रिश्तो की गर्मी

आपस में हंसी ठिठोली

शहर में बहुत याद आती है 

वो गांव की रातें


जब दिनभर की भागदौड़ करके

शाम को इस अजनबी शहर में

खुद को अकेला महसूस करता हूं

तब गांव की बहुत याद आती है


कमल राठौर साहिल

 शिवपुर मध्य प्रदेश

9685907895

Popular posts
सफेद दूब-
Image
भोजपुरी भाषा अउर साहित्य के मनीषि बिमलेन्दु पाण्डेय जी के जन्मदिन के बहुते बधाई अउर शुभकामना
Image
गीता सार
सफलता क्या है ?
Image
श्री लल्लन जी ब्रह्मचारी इंटर कॉलेज भरतपुर अंबेडकरनगर का रिजल्ट रहा शत प्रतिशत
Image