मेरी माँ

कमल राठौर साहिल

आज भी वो आखरी शब्द

मेरे कानों में गूँजते है

जब उखड़ती साँसों से 

मेरी माँ ने कहा

में जीना चाहती हु !

में मरना नही चाहती!


आज भी मुझे याद है

थरथराते हाथों से जब

मेरी माँ ने मेरे सिर पर 

आखरी बार हाथ फेरा

ओर कुछ पलों बाद ही

काल ने मेरी माँ की साँसों को

हर लिया सदा के लिए


आज माँ नही है 

मगर माँ की यादे 

आँखे नम कर जाती है।

मेरी माँ अब सदा यादों में

ज़िंदा रहती है


माँ को याद करने के लिए 

मुझे किसी विशेष दिन की

जरूरत नही पड़ती

माँ तो मेरी हर साँस में सदा 

ज़िंदा रहती है 

जब तक मेरी साँसे 

चल रही है

 माँ हर पल मेरी 

आती जाती साँसों में 

रहती है जब तक मे हू 

मेरी माँ परछाई की तरह 

सदा मेरे साथ है।


कमल राठौर साहिल

शिवपुर , मध्यप्रदेश

9685907895

Popular posts
अस्त ग्रह बुरा नहीं और वक्री ग्रह उल्टा नहीं : ज्योतिष में वक्री व अस्त ग्रहों के प्रभाव को समझें
Image
ठाकुर  की रखैल
Image
जीवीआईसी खुटहन के पूर्व प्रबंधक सह पूर्व जिला परिषद सदस्य का निधन
Image
प्रेरक प्रसंग : मानवता का गुण
Image
साहित्यिक परिचय : श्याम कुँवर भारती
Image