दोहे नीर के

 

 --प्रो.(डॉ)शरद नारायण खरे

नीर लिए आशा सदा,नीर लिए विश्वास !

नीर से सांसें चल रही,देवों का आभास !!



लगता बिल्कुल है अमिय, 

कहते जिसको नीर !

एक बूंद भी कम मिले,तो बढ़ जाती पीर !!


नीर बिना जीवन नहीं,अकुला जाता जीव !

नीर फसल औ' अन्न है,नीर "शरद" आजीव !!


नीर खुशी है,चैन है,नीर अधर मुस्कान !

नीर सजाता सभ्यता,नीर बढ़ाता शान !!


जग की रौनक नीर से,नीर बुझाता प्यास !

कुंये,नदी,तालाब में,है जीवन की आस !!


सूरज होता तीव्र जब,मर जाते जलस्रोत !

घबराता इंसान तब,अनहोनी तब होत !!


नीर करे तर कंठ नित,दे जीवन को अर्थ  !

नीर रखे क्षमता बहुत,नीर रखे सामर्थ्य !!


नीर नहीं बरबाद हो,हो संरक्षित नित्य !

नीर सृष्टि पर्याय है,नीर लगे आदित्य !!


नीर बादलों से मिले,कर दे धरती तृप्त !

बिना नीर के प्रकृति यह,हो जाती है तप्त !!


नीर पूज्य है ,वंदगी,देता है आनंद !

नीर देव की जय करो,जो है ब्रम्हानंद !!

            --प्रो.(डॉ)शरद नारायण खरे

                   प्राचार्य

    शासकीय जेएमसी महिला महाविद्यालय

   मंडला(म.प्र.)-481661

        (मो.  9425484382)

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