श्मशान में ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य शूद्र जल रहे हैं पास-2

डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव

ऐसी विपदा तो सौ सालों में,कभी नहीं थी आई।

कैसा ये परिदृश्य बना है, टीवी देखें आये रुलाई।

इंसानों ने विकास हेतु,किया प्रकृति से खिलवाड़।

वृक्ष एवं जंगल सब काटे,बंद ऑक्सीजन किवाड़।


बड़े बड़े तालाबों को पाटा,बिल्डर्स का है ये धंधा।

खनन माफियाओं का भी,काम हुआ नहीं ये मंदा।


वृक्षारोपण किए नहीं हैं,प्रदूषण भी ऐसा फैलाया।

साँस भी लेना दूभर है,कोरोना ने ऐसे पैर फैलाया।


पिघल रहा ग्लेशियर,ग्लोबल वॉर्मिंग का असर है।

भू जल भी क्षरण हो रहा,ऊर्जा ह्रास का असर है।


अपनी करनी का ये फल,मानव ही भोगा-भोगे गा।

धरती पर तो शुकून नहीं,हर घर में रोग है भोगे गा।


इन सब झंझावातों से कैसे,इंसान कोई संघर्ष करे।

आजिज आ गया है ये,इंसा कोविड से संघर्ष करे।


कितनी जानें रोज जा रहीं, हर तरफ है हाहाकार।

आपदा में भी अवसर का,कर रहे लोग हैं व्यापार।


नहीं रह गई इंसानियत कोई,ब्लैक में बेंचते दवाई।

लाशों का ढ़ेर लगा है,अस्पताल में बेड है न दवाई।


शमशान में जाते ही,मिट ये गया है सब छुआछूत।

पास पास ही जल रहे हैं,ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य शूद्र।


राजनीति लाशों पर भी होये,कितनी है ये बेहयाई।

किसी नेता को भी बिलकुल,इसमें शर्म नहीं आई।


कभी-2 मरने वाले के दरवाजे,पे पहुँच भले जाते।

नेतागण दिखावे में अपना भी,ये शोक जता जाते।

डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव

वरिष्ठ प्रवक्ता-पी बी कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र.

इंटरनेशनल चीफ एग्जीक्यूटिव कोऑर्डिनेटर

2021-22,एलायन्स क्लब्स इंटरनेशनल,प.बंगाल

संपर्क : 9415350596

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