ताकि जलती रहे शिक्षा की ज्योति

शिक्षक दिवस पर विशेष



माता पिता के बाद बच्चो के जीवन को निखारने और सही दिशा देने का काम शिक्षक ही करते है इस लिए शिक्षक का दर्जा हर मायने में ऊंचा ही होता है शिक्षक कमजोर से कमजोर छात्रों के अंदर हौसला उत्पन्न कर उन्हें मुख्य धारा से जोड़ने का कार्य करते है


आज शिक्षक दिवस पर कुछ ऐसे शिक्षक /शिक्षिकाओं के बारे में बताना चाहूंगी जिन्होंने कुम्हार की तरह झुग्गी झोपड़ी / फुटपाथ तथा रेलवे स्टेशनों पर भीख मांगने वाले बच्चो के जीवन को नया आकार दिया है और उन्हें काबिल बनाने के लिए लगभग तीन सालों से प्रयासरत है


जिन्होंने गुरु और शिष्य को नई परिभाषा दी है


लगभग तीन वर्ष पूर्व कुछ युवाओं ने बस्ती में एक नींव रक्खी "शुरुआत एक ज्योति शिक्षा की" जिसका उद्देश्य


शिक्षा की ज्योति को उन अंधकारमय बस्तियों फुटपाथों तथा स्टेशनों पर पहुंचाना था जहां बच्चो का जीवन पूर्णतः अंधकारमय था जहां के बच्चे नाम से नहीं जातियों से जाने जाते थे नशा करना ,भीख मांगना, आपसी मन मुटाव, द्वेष एक दूसरे पर हावी था लेकिन उन शिक्षकों की मेहनत और निरंतरता ने न सिर्फ बच्चो को पढ़ाना शुरू किया बल्कि उनमें संस्कार के बीज भी बोए


आसान नहीं था शुरू में गालियां तक सुनने को मिली लोग कहते अपना समय यहां मत बर्बाद करिए ये कभी नहीं पढेगे लेकिन मुश्किल भी नहीं था क्योंकि उन सभी शिक्षकों का मानना था की हम शिक्षा से बदलाव लाकर रहेंगे और एक शिक्षक ही समाज को नई दिशा दे सकते है और पढ़ाना शुरू किया चाहे कितनी भी गर्मी हो सर्दी हो उन शिक्षकों की निरंतरता और जज्बे में कोई कमी नहीं आई


समय के साथ बच्चो के माता पिता ने भी सहयोग करना शुरू किया चार बच्चो से शुरू हुआ सफर आज 150से 60 तक पहुंच गया वहां आज बच्चे न सिर्फ पढ़ते है बल्कि कई और बच्चो को पढ़ाते भी है


उन शिक्षक/शिक्षिकाओं की अथक मेहनत और प्रयास से कुछ बच्चो ने 10 वी और बारहवी में शानदार प्रदर्शन भी किया और अब कालेज में पढ़ाई कर रहे है जिनके लिए कालेज तक पहुंचना मात्र एक सपना सा था


कुछ बच्चो ने योग व खेल में खुद को साबित किया


आज लगभग 50से अधिक बच्चो की शिक्षा की जिम्मेदारी लोगो के सहयोग से भी उठाई जा रही है


 


 


 


इस शिक्षक दिवस के मौके पर


 


कुछ बच्चो से बात करने पर की उनके लिए इन शिक्षको की क्या भूमिका है आइए जानते है


 


रानी (हरीनगर बस्ती) - अगर शुरुआत के शिक्षक नहीं होते तो हम कभी स्कूल नहीं जा पाते आज हम चौथी कक्षा में है पढ़ रहे तो बस अपने शिक्षकों की वजह से बहुत बहुत धन्यवाद सभी को


 


खुशबू ( हरीनगर बस्ती) - हमारे शिक्षक न सिर्फ हमे पढ़ाते है बल्कि हमारी समस्याओं को भी सुलझाते है मेरी मां चाहती थी मै कम्प्यूटर लू पर मुझे चित्रकला लेना था मां को जब सर ने समझाया तो मा मान गई।


 


नेहा ( हरीनगर बस्ती) - मै जिस बस्ती से हूं वहां शादियां जल्दी कर दी जाती है कई बार जब हम सभी लड़की लड़के साथ पढ़ते थे तो लोग तरह तरह की बातें भी करते थे पर हमारे शिक्षकों ने हमे कहा की जरूरी नहीं हम उनकी भाषा में जवाब दे तुम अपनी पढ़ाई से जवाब दे सकती हो और मैंने खूब पढ़ाई की बारहवी में प्रथम आई तो उन्हीं लोगों ने खूब सराहना भी की मेरे गुरु मेरे आदर्श है।


 


मोनू (हरीनगर बस्ती) - मै हमेशा बस्ती में पतंग उड़ाया करता था 10वी में जैसे तैसे पास हुआ था लेकिन जब से शुरुआत के शिक्षक मिले जिंदगी को नई दिशा मिली बारहवी में उन्हीं की मदद से मैंने 65 प्रतिशत अंक हासिल किए मै अपने सभी शिक्षकों का आभारी हूं जिन्होंने मुझे सही राह दिखाई


 


रजनी ( चुंगी बस्ती) - मैंने कभी नहीं सोचा था फिर से पढ़ सकुगी आज शुरुआत के शिक्षकों की वजह से पढ़ ही नहीं रही बल्कि पढ़ा भी रही हूं ।


 


नंदनी ( चुंगी बस्ती) - मै मंडल तक कबड्डी खेलने जा सकी क्युकी सर ने बहुत मोटिवेट किया मेरे पास खेल के समान नहीं थे सबकुछ उन्होंने ही लाकर दिया बोला तुम्हे बस खेलना है और आगे बढ़ना है ऐसे शिक्षक सबको मिले 


 


आंचल( चुंगी बस्ती) - मुझे अब अंग्रेजी में थोड़ा थोड़ा बोलना आ गया है और ये हमारे शिक्षकों की वजह से


 


वर्षा ( हरीनगर बस्ती) - अगर शुरुआत के शिक्षक नहीं होते तो मेरे भाई मेरी अबतक शादी करा देते आज मै पढ़ रही हूं तो अपने गुरु की वजह से जो समय समय पर मुझे सपोर्ट करते है।


 


अनीता ( पत्थर गिरजाघर) - पहले मै भीख मांगती थी सर ने समझाया तो मैंने भीख मांगना छोड़ दिया।


 


धीरज ( चुंगी बस्ती) - मेरे पिता नहीं है मां गांव में रहती है मेरी शिक्षिका ने मुझे शुरुआत के शिक्षकों से मिलवाया आज मै बारहवी का छात्र हूं हमे शिक्षक न सिर्फ पढ़ाते है साथ ही साथ समय समय पर मोटिवेट करते रहते है ।


 


 


ये कुछ बच्चो के विचार थे उन सभी शिक्षकों के लिए जो इन कच्ची मिट्टी रूपी बच्चो को ज्ञान के भंडार से रोज तपाने का काम कर रहे,


ये शिक्षक है प्रयागराज की "शुरुआत एक ज्योति शिक्षा की" की पूरी टीम (पूजा सिंह, अंजली,आकाश,अंजू,अभिषेक शुरुआत,,आदित्य,प्रिंशु,विकास, अंजली सिंह,,अभिषेक कुमार,आशिया,अमन, पूजा, रूपेश,नीरज,नवनीत,रीता विश्वकर्मा' अमित,उत्कर्ष,अंकिता,नितिन, आयुष,अर्पित,महिमा,रवि,शोभित )


जो रोजाना निस्वार्थ भाव से स्टेशन ,तिरंगा पार्क,बस्ती, फुटपाथों पर गर्मी हो या सर्दी या बारिश इन बच्चो का भविष्य सवारने में लगे है।


 


ऐसे सभी शिक्षक शिक्षिकाओं को समर्पित मेरी कविता के साथ उन सभी को शिक्षक दिवस पर मेरा कोटि कोटि नमन।


 


वो शिक्षक भी है और छात्र भी


 


वो शिक्षक भी है और छात्र भी,


है परेशानियां उनके साथ भी


 


पर करते नहीं कभी आह भी


कभी मां डाट देती तो कभी पिता मार भी,


 


लेकिन उन्हें फिक्र है तो बस नौनिहालों के आज की


क्यूंकि वो शिक्षक भी है और छात्र भी


 


कोई है छात्र हिंदी का कोई अंग्रेजी तो कोई पढ़ रहा अर्थशास्त्र भी,


 


क्युकी वो शिक्षक भी है और छात्र भी।


 


जब बारिश में भीगी थी किताब भी,


मन बेचैन हुआ पर था पूरा आत्मविश्वास भी।


 


क्यूंकि वो शिक्षक भी है और छात्र भी


करना होता है अपना असाइनमेंट और क्लास भी,


कभी डाट दिया तो करते है ढेरों लाड भी।


क्योंकि वो शिक्षक भी है और छात्र भी।


 


कभी होते नहीं पैसे उनके पास भी,


तो कर लेते है थोड़ा कदमताल भी।


क्यूंकि वो शिक्षक भी है और छात्र भी


 


स्वलिखित /मौलिक लेख


      


                 शालिनी यादव


                  प्रयागराज 


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